Kohramlive : राजधानी रांची के खेलगांव के हर कोने में युवाओं की चमकती आंखें, सेना के जांबाज अफसरों का आत्मविश्वास और स्टार्ट-अप्स का जज्बा मिलकर ऐसा माहौल बना गये, जिससे झारखंड की धरती खुद गर्व से सिर उठाई। पूर्वी कमान मुख्यालय और सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेन्स मैन्युफैक्चर्स (SIDM) के सहयोग से आयोजित ईस्टर्न टेक्नोलॉजी कॉन्क्लेव का अंतिम दिन पूरी तरह रक्षा तकनीक और स्वदेशी नवाचार के नाम रहा।
ड्रोन बने आसमान का सितारा
इस कॉन्क्लेव का सबसे बड़ा आकर्षण रहे स्वदेशी ड्रोन। प्रदर्शनी में ऐसे-ऐसे मॉडल पेश हुये जिनकी निगरानी और युद्धक क्षमता ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया। भारतीय सेना द्वारा ऑपरेशन सिंदूर में इस्तेमाल किये गये ड्रोन का लाइव डिस्प्ले लोगों को मंत्रमुग्ध कर गया। स्थानीय संसाधनों से विकसित इन अनमैन्ड एयर व्हीकल्स (UAVs) ने यह साबित कर दिया कि भारत अब आयातित तकनीक पर निर्भर रहने वाला देश नहीं, बल्कि खुद अपनी रक्षा ताकत गढ़ने वाला राष्ट्र है। रांची के इस आयोजन ने युवाओं और स्टार्ट-अप्स को अपने हुनर दिखाने का बड़ा मंच दिया। कई युवा इंजीनियरों ने सीमित संसाधनों में बनाये गये ऐसे मॉडल पेश किये जो सेना के अभियानों में अहम भूमिका निभा सकते हैं। इन युवाओं की चमकती आंखों में भविष्य का भारत झलक रहा था, जहां गांव-कस्बों की प्रयोगशालाओं से भी दुनिया हिलाने वाले आविष्कार जन्म ले रहे हैं।
उद्योग और सेना का मजबूत रिश्ता
कॉन्क्लेव में रक्षा उद्योग और सेना के प्रतिनिधियों के बीच कई अहम साझेदारी चर्चाएं हुईं। पूर्वी कमान के अफसरों ने स्थानीय उद्योगों को रक्षा उत्पादन में शामिल करने के लिए नए रास्ते सुझाए। यह पहल सिर्फ तकनीक नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत के सपने को जमीन देने की दिशा में मजबूत कदम है। गुवाहाटी, शिलांग और कोलकाता के बाद जब यह कॉन्क्लेव पहली बार रांची की धरती पर पहुंचा तो झारखंड ने इसे खुले दिल से अपनाया। खेलगांव के मैदान पर दिखी तकनीकी चमक ने यह संदेश दिया कि “अब भारत सिर्फ खरीदार नहीं, खुद अपना शस्त्र निर्माता है।”












