Ranchi : राजधानी रांची में मकर संक्रांति को लेकर तिलकुट और दही-चूड़ा का बाजार सजधज कर तैयार है। हर चौक-चौराहे पर तिलकुट की सौंधी खुशबू लोगों को यह जता रहा है कि दही-चूड़ा और तिलकुट खाने का दिन बहुत करीब आ गया है। घर में मौजूद दादी, नानी और मां ने सूप पर तिलों को फटकना भी शुरू कर दिया। गुड़ का भी इंतेजाम हो गया है। आम धारणा है कि मकर सक्रांति के दिन गंगा स्नान कर सूर्य देवता की पूजा आरधना कर तिल का प्रसाद ग्रहण करने से बहुत सारे दुख-दर्द दूर हो जाते है। सेहत में इसका अलग से फायदा है। तिल कई रोगों को दूर भगाने का घरेलू नुस्खा भी है।
तिलकुट का कारोबार करने वाले त्रिभुवन ने बताया कोरोना महामारी में तिलकुट का बाजार नहीं सजा। लेकिन इस बार पूरी गुंजाइश है कि कारोबार बेहतर होगा। इस बार तिलकुट की कई वैरायटी बाजार में आ गयी है। गुड़ और चीनी से बने अलग-अलग किस्म के तिलकुट बाजार में बिकने शुरू हो गए है। कई जगहों पर रोड किनारे ही ताजा-तरीन तिलकुट बनते दिखाई भी पड़ने लगे है। गरीब से अमीर तक के बजट का तिलकुट बिक रहे है। गया का मशहूर तिलकुट भी राजधानी रांची में लोगों को अपनी ओर खींच रहा है। ठंड में तिलकुट खाने का अपना एक अलग मजा है। वहीं गंगा स्नान को लेकर भी तैयारी शुरू हो गयी है। जो बाहर नहीं जा सकते वो राजधानी रांची के ही स्वर्णरेखा नदी से लेकर अन्य घाटों पर डुबकी लगाने का मन बना चुके है। ठंड ने भी सितम ढाना कुछ कम किया है। मकर सक्रांति के बाद इसी माह विद्यादायिनी मां सरस्वती की भी पूजा है। 26 जनवरी का डेट मां सरस्वती के भक्तों में एक नई उमंग भरना शुरू कर दिया है। चंदा को लेकर अलग-अलग टोली भी सड़कों से लेकर गली-मोहल्ले तक राउंड लगाना शुरू कर दिया है।
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