Ranchi : झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी के प्रदेश प्रवक्ता विजय शंकर नायक ने कहा कि कई मामले अब महज विधायी प्रक्रिया का नहीं, बल्कि जनता की सुरक्षा, सामाजिक न्याय, युवाओं के भविष्य और झारखंड के विकास से जुड़ा सवाल बन गया है। विजय शंकर नायक ने कहा कि सार्वजनिक रिकॉर्ड के मुताबिक अप्रैल 2025 में झारखंड विधानसभा सचिवालय के हवाले से 13 विधेयकों के राजभवन में लंबित होने की बात सामने आई थी। उन्होंने मांग की कि अगस्त 2026 में इन सभी विधेयकों की मौजूदा स्थिति राजभवन और विधानसभा सचिवालय को सार्वजनिक करनी चाहिये। उन्होंने सवाल उठाया कि कौन-सा विधेयक मंजूर हुआ, कौन वापस आया, किस पर पुनर्विचार हुआ, कौन राष्ट्रपति के विचारार्थ भेजा गया और कौन अभी भी लंबित है, इसकी पूरी जानकारी जनता के सामने क्यों नहीं है?
मॉब लिंचिंग बिल पर सवाल
कांग्रेस प्रवक्ता ने झारखंड प्रिवेंशन ऑफ मॉब वायलेंस एंड मॉब लिंचिंग बिल, 2021 का जिक्र करते हुये कहा कि इसका सीधा संबंध नागरिकों की सुरक्षा और कानून के शासन से है।उनका सवाल है कि जब विधानसभा ने मॉब हिंसा और मॉब लिंचिंग जैसी घटनाओं से निपटने के लिये विशेष कानूनी व्यवस्था का रास्ता तैयार किया, तो उसकी संवैधानिक स्थिति क्या है और वह कब लागू होगा? नायक ने कहा कि भीड़ की हिंसा का शिकार व्यक्ति किसी दल का नहीं, सबसे पहले एक नागरिक होता है। इसलिये नागरिक सुरक्षा से जुड़े कानून पर अनिश्चितता को सामान्य प्रशासनिक देरी मानकर नहीं छोड़ा जा सकता। वहीं, झारखंड आरक्षण (संशोधन) विधेयक, 2022 को लेकर भी कांग्रेस ने सवाल उठाये हैं। नायक ने पंडित रघुनाथ मुर्मू जनजातीय विश्वविद्यालय से जुड़ी विधायी पहल का हवाला देते हुये कहा कि आदिवासी समाज की उच्च शिक्षा, भाषा, संस्कृति और ज्ञान परंपरा के लिये ऐसे प्रयास बेहद महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय से जुड़ी विधायी स्थिति में बाद में बदलाव हुए हैं। इसलिए पुराने विधेयक को आज भी लंबित बताने के बजाय राजभवन और विधानसभा को इसकी अद्यतन स्थिति सार्वजनिक करनी चाहिये। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की शिक्षा और भविष्य से जुड़े हर विधायी प्रयास की स्थिति साफ होनी चाहिये।







