Kohramlive : जिंदगी भर लोगों के सामने हाथ फैलाकर दो वक्त की जरूरतें जुटाने वाली एक बुजुर्ग महिला की मौत के बाद जब उसके घर का दरवाजा खुला, तो अंदर का नजारा देखकर रिश्तेदारों की आंखें खुली की खुली रह गईं। कर्नाटक के मांड्या शहर के गुथलू इलाके में रहने वाली नूर उन्नीसा की 19 अगस्त को उम्र से जुड़ी बीमारी के चलते मौत हो गई। वह कई वर्षों से भीख मांगकर अपना गुजारा कर रही थीं। लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि छोटी-छोटी मदद के रूप में मिलने वाले पैसों को वह चुपचाप जोड़ती भी जा रही थीं। मौत के बाद उनके किराये के घर की तलाशी ली गई तो नोटों और सिक्कों से भरे बैग मिले। जब पैसे गिने गये तो कुल रकम करीब 8 लाख 40 हजार रुपये निकली।
दो दिन तक चलता रहा नोट-सिक्के गिनने का सिलसिला
नूर उन्नीसा के अंतिम संस्कार के बाद रिश्तेदार उनके घर पहुंचे। वहां खोजबीन के दौरान उन्हें पैसे से भरे कई बैग मिले। रकम इतनी थी कि उसे गिनना भी आसान नहीं था। दर्जनों लोग जुटे और करीब दो दिन तक नोट और सिक्के गिनते रहे। इसके बाद पूरी रकम रिश्तेदारों को सौंप दी गई। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पैसे गिनने की प्रक्रिया मस्जिद में रिश्तेदारों की मौजूदगी में हुई, जहां पुलिस और समुदाय के लोग भी मौजूद थे।
बहन के साथ रहती थीं, फिर अकेली हो गईं
नूर उन्नीसा अपनी बहन के साथ किराये के मकान में रहती थीं। दोनों बहनों की शादी नहीं हुई थी। करीब दो साल पहले उनकी बहन की भी मौत हो गई। इसके बाद नूर उन्नीसा घर में अकेली रहने लगीं। स्थानीय लोगों के मुताबिक, वह मानसिक तनाव से भी जूझ रही थीं। वह न बोल पाती थीं और न सुन सकती थीं। इसके बावजूद भीख मांगने का सिलसिला उन्होंने नहीं छोड़ा। सबसे हैरान करने वाली बात यही रही कि नूर उन्नीसा के पास इतनी बड़ी रकम जमा है, इसकी जानकारी उनके आसपास रहने वाले लोगों और रिश्तेदारों तक को नहीं थी। उनकी मौत के बाद जब बैग खुले तो उसमें जमा रकम ने हर किसी को चौंका दिया।







