Kohramlive : जिस योजना का सहारा देश के कमजोर और असंगठित वर्ग को बुढ़ापे में आर्थिक सुरक्षा देने के लिये बनाया गया, उसी में बड़ी संख्या में ऐसे लोग शामिल पाये गये जो नियमों के मुताबिक इसके हकदार ही नहीं थे। अटल पेंशन योजना (APY) को लेकर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक यानी CAG की रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक सितंबर 2022 तक योजना में करीब 4.06 करोड़ लाभार्थी पंजीकृत थे। इनमें 14,14,947 आयकरदाता और 13,67,080 ऐसे लोग पाये गये जो पहले से दूसरी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ ले रहे थे। यानी दोनों श्रेणियों को जोड़ें तो करीब 28.12 लाख अपात्र लाभार्थी योजना में शामिल पाये गये।
आखिर योजना में कौन नहीं हो सकता शामिल?
अटल पेंशन योजना की शुरुआत साल 2015 में कमजोर वर्ग और असंगठित क्षेत्र के लोगों को बुढ़ापे में नियमित आय का सहारा देने के लिये की गई थी। साल 2022 में नियम स्पष्ट किये गये कि आयकरदाता व्यक्ति इस योजना में नया खाता नहीं खोल सकता। वहीं, ऐसे लोग जो पहले से कुछ दूसरी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ ले रहे हैं, उनकी पात्रता भी नियमों के अनुसार जांची जानी है। लेकिन CAG की जांच में बड़ी संख्या में ऐसे लोग सामने आये, जिन्होंने इन शर्तों के बावजूद योजना का लाभ लिया।
14 लाख से ज्यादा टैक्सपेयर्स भी बने लाभार्थी
CAG रिपोर्ट के हवाले से मीडिया में आई खबर के मुताबिक सितंबर 2022 तक APY के कुल लाभार्थियों में 14 लाख 14 हजार 947 लोग आयकरदाता पाये गये। वहीं 13 लाख 67 हजार 80 लोग ऐसे थे जो दूसरी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ भी ले रहे थे। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि करीब 4 लाख लोग ऐसे थे जो एक साथ दोनों श्रेणियों में आते थे, यानी वे आयकरदाता भी थे और दूसरी योजना का लाभ भी ले रहे थे।
शुरुआत में ही जुड़ गये थे 24.84 लाख लोग
अटल पेंशन योजना जब 2015-16 में शुरू हुई, तब पहले ही साल करीब 24 लाख 84 हजार 895 लोग इससे जुड़े थे। उस समय इनमें 1 लाख 91 हजार 409 आयकरदाता भी शामिल थे। हालांकि योजना की शुरुआत के समय टैक्सपेयर्स को लेकर नियम उतने स्पष्ट नहीं थे। बाद में साल 2022 में स्थिति साफ की गई और आयकरदाताओं को नये नामांकन के लिये अपात्र कर दिया गया। CAG की रिपोर्ट ने इसकी एक बड़ी वजह कमजोर जांच प्रक्रिया को बताया है। रिपोर्ट के अनुसार आवेदन के समय लाभार्थियों ने जो जानकारी खुद दी, उसी पर काफी हद तक भरोसा कर लिया गया। उनके दावों की पर्याप्त क्रॉस-चेकिंग नहीं हुई। यानी सिस्टम ने यह मान लिया कि आवेदक ने जो घोषणा की है, वह सही है। यहीं से वह दरवाजा खुला, जिसके रास्ते अपात्र लोग भी योजना में दाखिल होते चले गये।
अब लाभार्थियों से हो सकती है रकम की वसूली?
डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज की ओर से कहा गया है कि आवेदन के समय दी गई जानकारी सही होने की घोषणा करना लाभार्थी की जिम्मेदारी है। नियमों के मुताबिक अगर कोई व्यक्ति बाद में आयकरदाता बनता है या उसकी पात्रता में कोई बदलाव आता है, तो उसे संबंधित बैंक को इसकी जानकारी देनी होती है। ऐसे में अपात्र तरीके से मिले लाभ की भविष्य में रिकवरी भी की जा सकती है।
CAG ने सरकार को क्या सुझाव दिया?
CAG ने अपात्र लोगों को योजना से बाहर करने की सिफारिश की है। वहीं, लाभार्थियों की निगरानी और व्यवस्था को मजबूत बनाने की जरूरत बताई गई है। रिपोर्ट में नियमन और निगरानी के लिये SEBI और IRDAI जैसी संस्थागत व्यवस्था की तर्ज पर मजबूत मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित करने पर भी जोर दिया गया है।
60 साल के बाद मिलती है 1,000 से 5,000 रुपये तक पेंशन
अटल पेंशन योजना का मकसद 60 साल की उम्र के बाद नियमित आय का सहारा देना है। पात्र लाभार्थी को योगदान के आधार पर 1,000 रुपये से 5,000 रुपये तक की गारंटीड मासिक पेंशन मिल सकती है। पेंशनधारक की मृत्यु के बाद पात्र पति या पत्नी को पेंशन का लाभ जारी रहने का प्रावधान है। पति-पत्नी दोनों की मृत्यु के बाद नामांकित व्यक्ति को योजना के नियमों के अनुसार जमा राशि वापस की जाती है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक पिछले एक दशक में देश में पेंशन कवरेज का विस्तार हुआ है। NPS और APY को देश के पेंशन ढांचे का अहम हिस्सा माना जा रहा है। मार्च 2026 तक NPS में 2.17 करोड़ से ज्यादा सदस्य बताये गये हैं। वहीं अप्रैल 2026 तक Employees’ Pension Scheme (EPS) के करीब 7.89 करोड़ सदस्य थे। ऐसे में APY में सामने आई गड़बड़ी सिर्फ कुछ लाख खातों का मामला नहीं है। यह उस पूरी व्यवस्था की परीक्षा भी है, जिसके जरिये सरकार करोड़ों लोगों तक सामाजिक सुरक्षा पहुंचाने की कोशिश कर रही है।
गरीब के बुढ़ापे का सहारा, सिस्टम की जांच का इम्तिहान
अटल पेंशन योजना की कल्पना उन लोगों के लिये की गई थी, जिनके बुढ़ापे में नियमित आमदनी का कोई मजबूत सहारा नहीं होता। ऐसे में अगर अपात्र लोग सिस्टम की कमजोरी का फायदा उठाते हैं, तो असली जरूरतमंदों तक पहुंचने वाले संसाधनों और योजना की विश्वसनीयता दोनों पर सवाल खड़े होते हैं। CAG की रिपोर्ट ने अब एक सीधा सवाल सामने रखा है, जब पेंशन गरीब के बुढ़ापे की लाठी है, तो उस लाठी पर सिस्टम की निगरानी इतनी कमजोर क्यों रही? आने वाले समय में अपात्र लाभार्थियों की पहचान, उनके खातों पर कार्रवाई और संभावित रिकवरी से यह साफ होगा कि सरकार इस रिपोर्ट के बाद व्यवस्था को कितना मजबूत करती है।







