Ranchi : विद्या विकास समिति, झारखण्ड द्वारा आयोजित जनजातीय आचार्य प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन समारोह में आज गर्वनर संतोष कुमार गंगवार ने कहा,“भारतीय संस्कृति, जीवन मूल्यों और चिंतन पर आधारित शिक्षा को गांव-गांव, वनवासी क्षेत्रों तक पहुंचाने का यह प्रयास वास्तव में प्रेरणादायक है। आज इस केंद्र को देखकर हृदय से आह्लादित हूं।” उन्होंने कहा , जब एक नारी शिक्षित होती है, तो पूरा समाज शिक्षित होता है। यहां उपस्थित महिलाओं की भागीदारी यह सिद्ध करती है कि जनजातीय क्षेत्र अब सिर्फ जागरूक नहीं, बल्कि शिक्षित भी हो रहे हैं।
राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने बताया कि झारखण्ड में विद्या विकास समिति द्वारा संचालित 213 औपचारिक विद्यालय और 209 सरस्वती संस्कार केन्द्र ग्रामीण शिक्षा को एक नई दिशा दे रहे हैं। नगरों की उपेक्षित बस्तियों में भी संस्कारयुक्त, नि:शुल्क शिक्षा का कार्य हो रहा है, जो सामाजिक सेवा का सशक्त उदाहरण है। उन्होंने आचार्यों से अपील की “आप केवल शिक्षक न बनें, बल्कि संस्कारों के संवाहक बनें। अपने लिये तो सभी जीते हैं, लेकिन जो समाज के लिये जीते हैं, वही सच्चे अर्थों में जीते हैं। ऐसे लोग युगों तक स्मरणीय रहते हैं। राज्यपाल ने विद्या भारती की उस सोच की सराहना की जिसमें यह लक्ष्य निर्धारित है ,कोई भी बच्चा मूल्यपरक शिक्षा से वंचित न रहे।”
राज्यपाल ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा जनजातीय समाज के प्रति दिखाई गई संवेदनशीलता के फलस्वरूप झारखण्ड में एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों को प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे अब आदिवासी समाज की प्रतिभा को नई उड़ान मिलेगी। अंत में राज्यपाल ने यह विश्वास भी दिलाया कि “राजभवन का द्वार हर उस नागरिक के लिये खुला है, जो झारखण्ड के विकास में योगदान देना चाहता है। हम सब मिलकर ही राज्य को समृद्धि और संस्कृति के शिखर तक पहुंचायेंगे।” राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने मंच से न केवल प्रशिक्षण ले रहे 387 आचार्यों को शुभकामनाएं दीं, बल्कि उनके सेवा-समर्पण को जनजातीय समाज की नई उम्मीद बताया।
इसे भी पढ़ें : गढ़वा में ठनका से दहशत, आज मासूम हुये शिकार
इसे भी पढ़ें : नक्सलियों का ‘गॉड फादर’ मा’रा गया, गृह मंत्री ने कही बड़ी बात…
इसे भी पढ़ें : पुलिस की गो’ली लगते ही नक्सली कमांडर भागा यूपी, फिर…














