Kohramlive : रंगभरी एकादशी का पावन पर्व इस बार 27 फरवरी को मनाया जायेगा। यह वही तिथि मानी जाती है, जब भगवान शिव ने माता पार्वती का गौना कर पहली बार उन्हें काशी ले जाकर प्रेम और परंपरा का अद्भुत संगम रचा। इसे आमलकी एकादशी भी कहा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के साथ शिव-पार्वती की संयुक्त पूजा होती है। मान्यता है कि इस व्रत और पूजा से सुख-समृद्धि, सौभाग्य और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। एकादशी तिथि 27 फरवरी शुरू होकर रात 12:33 बजे समाप्त हो जायेगी। इस रोज व्रत और पूजा है। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5.17 बजे से 6.05 बजे तक है। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12.16 बजे से 1.02 बजे तक है। इस समय पूजा करने से विशेष पुण्य और आध्यात्मिक शांति की प्राप्ति मानी जाती है। पारण का समय 28 फरवरी सुबह 6.47 बजे से 9.06 बजे के बीच व्रत पारण शुभ रहेगा। पारण से पहले पूजा-पाठ और दान करने का विशेष महत्व बताया गया है।
पूजा विधि
सुबह स्नान कर पीले वस्त्र धारण करें। चौकी पर शिव, पार्वती और विष्णु की प्रतिमा स्थापित करें। चंदन, बिल्वपत्र, भांग, धतूरा व पुष्प अर्पित करें। माता पार्वती को श्रृंगार सामग्री और गुलाबी गुलाल चढ़ायें। भगवान विष्णु को आंवला अर्पित करें, आंवले के वृक्ष के नीचे दीप जलायें। शिव को खीर व ठंडाई का भोग लगाकर शिव चालीसा और व्रत कथा का पाठ करें।मान्यता है कि इस दिन की पूजा से दांपत्य जीवन में मधुरता, घर में खुशहाली और मन में शांति का संचार होता है। जैसे काशी नगरी में शिव-पार्वती का मिलन रंगों से सजा था, वैसे ही भक्तों का जीवन भी इस दिन भक्ति के रंग से भर उठता है।
डिस्कलेमर: यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और पंचांग पर आधारित है।








