Hazaribagh (Barkattha) (Praveen Pandey) : पहले तो नदी पार करने के लिये कुछ भी जुगाड़ नहीं था। चारों तरफ पानी ही पानी दिखता। आने-जाने में बहुत दिक्कत होती थी। माथा तो तब दुखने लगता था, जब रात में गांव की किसी बहू-बेटी को प्रसव पीड़ा होती थी। कोई बीमार पड़ जाये तो और आफत। उन्हें कांधा में डोली बनाकर कर नदी के उस पार ले जाना पड़ता था। दूसरा कोई चारा नहीं था।
आदिवासी इस बहुल टोला की तरफ कई बार मंत्री, MLA से लेकर ऑफिसर तक का ध्यान दिलाया गया, पर उनकी सोई तकदीर कभी नहीं जागी। बाद में गांव के ही लोगों ने आपस में चंदा वैगरह कर खुद से काठ पुल बनाया। अब पहले से थोड़ा ठीक हो गया, पर काठ पुल पार करते समय कलेजा धकधक करते रहता है। ना जाने कब टूट जाये और बड़का आफत हो जाये। डर से लोग बहुत कम ही आना-जाना करते हैं। कई बार टूट भी चुका है। यह कहना है हजारीबाग के बरकट्ठा के मेरमगड्ढा के केंदुआटांड़ टोला के लोगों का। करीब 500 आबादी वाले इस टोला में कोई झांकने तक नहीं आता। गांव घर की बहू-बेटी डर से काठ पुल से आना जाना नहीं करती। वो लबालब पानी से ही गुजरती है। बहुत बुरा हाल है उनके टोला का। बाकी बिजली और नल के बारे में बोलना ही कुछ बेकार है।
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