Kohramlive : सावन की तीसरी सोमवारी इस बार आस्था के लिहाज से बेहद खास मानी जा रही है। सात वर्षों बाद तीसरी सोमवारी के दिन नागपंचमी का संयोग बना है। यही वजह है कि सोमवार को भगवान शिव के साथ नागदेव की पूजा-अर्चना का भी विशेष उत्साह देखने को मिलेगा। सुबह की पहली किरण के साथ ही शहर के प्रमुख शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की कतार लगने की उम्मीद है। कहीं गंगाजल से अभिषेक होगा तो कहीं दूध, दही, शहद और पंचामृत से भोलेनाथ का शृंगार किया जायेगा। मंदिर परिसर ‘हर-हर महादेव’ और ‘बोलबम’ के जयकारों से गूंजते नजर आयेंगे। सोमवारी को लेकर रांची से लेकर पटना के प्रमुख शिव मंदिरों में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुये व्यवस्था की गई है। भक्त भगवान शिव को गंगाजल, दूध, दही, गन्ने का रस, अनार का रस, शहद, घी, पंचामृत, चंदन, अक्षत, इत्र, फूल-माला, बेलपत्र, धतूरा और आक अर्पित करेंगे।
शिव के साथ नागदेव की पूजा का विशेष संयोग
पंडि झा जी के अनुसार, भगवान शिव और उनके प्रिय नाग की एक साथ पूजा को विशेष शुभ माना जाता है। इस दिन रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय जाप और नाग पूजन का विशेष महत्व रहेगा। नागपंचमी केवल धार्मिक आस्था का पर्व ही नहीं, बल्कि प्रकृति और जीव-जंतुओं के प्रति सम्मान का संदेश भी देती है। भगवान शिव के गले में विराजमान नाग सृष्टि के संतुलन और जीवों के संरक्षण की भावना का प्रतीक माना जाता है। सावन का महीना वैसे ही शिवभक्ति से सराबोर रहता है। सोमवारी के दिन भक्त विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। मान्यता के अनुसार रुद्राभिषेक के साथ महामृत्युंजय मंत्र, शिवसहस्रनाम, शिव पंचाक्षर, शिव महिम्न स्तोत्र, रुद्राष्टक, शिव कवच और शिव तांडव स्तोत्र का पाठ विशेष फलदायी माना जाता है।
भोलेनाथ को क्या चढ़ाएं, क्या है मान्यता?
श्रद्धालु अपनी मनोकामना के अनुसार अलग-अलग सामग्री भगवान शिव को अर्पित करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार—
जल — मन को शांति और स्नेह प्रदान करने वाला माना जाता है।
दूध — स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि से जोड़ा जाता है।
दही — जीवन की परेशानियां दूर होने की मान्यता है।
घी — शक्ति और ऊर्जा से संबंधित माना जाता है।
शहद — वाणी में मधुरता का प्रतीक माना जाता है।
इत्र — मन और विचारों की शुद्धता से जोड़ा जाता है।
केसर — सौम्यता का प्रतीक माना जाता है।
चंदन — यश, सम्मान और व्यक्तित्व की गरिमा से जोड़ा जाता है।
मनोकामना के अनुसार ये चीजें अर्पित करने की मान्यता
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अलग-अलग इच्छाओं के लिये अलग सामग्री अर्पित करने की परंपरा भी है, दीर्घायु के लिये आक के फूल, सुख के लिये हरसिंगार, मोक्ष के लिये आक, अलसी या शमी पत्र तथा समृद्धि के लिये दूध और गन्ने के रस से अभिषेक करने की मान्यता है।








