कान में गूंजी बिटिया की बात और खूंखार ने कर दिया… देखें वीडियो

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Ranchi (Rajesh Singh) : कान में गूंजी बिटिया की बात और खूंखार ने कर दिया…। खेलने-कूदने की उम्र में ही उग्रवादियों के सा‍थ चला गया सुरेश देखते ही देखते बड़का माओवादी बन गया। वह कुंदन पाहन के दस्‍ते में शामिल हो गया। पुलिस की हर गतिविधि की जानकारी संगठन को देता था। संगठन के प्रति उसके समर्पण और लगन को देखते हुए साल 2002 में उसे एरिया कमांडर का तमगा मिला। वह पुलिस के लिए स‍िरदर्द बनता चला गया। लगातार एक के बाद एक संगीन कांडों को अंजाम देकर पुलिस फाइल में मोस्‍टवांटेड बन गया। साल 2004 में पुलिस ने उसे अरेस्‍ट कर होटवार जेल भेजा। जेल में रहकर उसने मैट्रिक पास की। करीब 5 साल बाद जेल से छूटकर गांव पहुंचा, तो देखा लोगों में उसका डर खत्‍म हो चुका था। गांव के बुद्धू दास व अन्य उसे परेशान करने लगे। वे सब गांव में दबंग माने जाते थे। उसे जान से मारने का प्रयास भी किया गया। दबंगों से परेशान होकर सुरेश ने फिर हथियार थामने का मन बनाया।
साल 2010 में ही खूंखार नकुल यादव और दिनेश उर्फ चश्‍मा से मिला। दिनेश ने उसे दुर्दांत बुद्धेश्‍वर उरांव और कृष्‍णा अहीर उर्फ प्रसाद दस्‍ते के साथ काम करने की जिम्‍मेवारी सौंपी। वह फिर संगठन के विश्‍वास पर खड़ा उतरा और 2012 में पोड़ाहाट का सबजोनल कमांडर बना दिया गया। उसे संगठन ने उम्‍दा किस्‍म का SLR दिया। ताबड़तोड़ संगीन वारदात को अंजाम देकर फिर कोहराम मचाना शुरू कर दिया। साल 2015 में संगठन ने उसे आनंदपुर का जोनल कमांडर बनाया। वह लगातार आतंक की गाथा लिखने लगा। देखते ही देखते उसके नाम हत्‍या, लूट, रंगदारी, पुलिस पार्टी पर हमला के 67 संगीन कांड पुलिस फाइल में दर्ज हो गये। इनमें 11 सिर्फ मर्ड केस शामिल हैं। सरकार ने उसपर 10 लाख का इनाम रखा। खूंखार और दुर्दांत सुरेश ने हौले से सिर्फ इतना कहा कि उसका मन बेटी की एक बात ने बदल दिया। बेटी ने चिट्ठी लिखकर कहा- बाबा जंगल के जीवन में कुछ नहीं रखा है। दूसरों की जान लेने से बेहतर होगा दूसरों के काम आएं। बेटी की इसी बात से मन बदला और सरेंडर करने की ठान ली। उसने मुख्‍यधारा में लौटने का मन बनाया। सुरेश ने 2 लाख के इनामी एरिया कमांडर लोदरो लोहरा उर्फ सुभाष से बात की। सुभाष को भी उसकी बात रास आ गई। दोनों ने बीते साल दिसंबर में ही संगठन छोड़ दिया और लगातार पुलिस के संपर्क में रहा। आज यानी 1 मार्च को सुरेश और लोदरो ने पुलिस के आलाधिकारियों के समक्ष हथियार डाल दिये। सुनें क्‍या बोलें आईजी अभियान अमोल वेणुकांत होमकर, रांची जोन के आईजी पंकज कंबोज, आईजी सीआरपीएफ आईजी राजीव सिंह और सरेंडर करने वाले सुरेश और लोदरो लोहरा…

 

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