Ranchi : 10 जून से 26 जून तक झारखंड की फिजाओं में गूंजेगा सिर्फ एक स्वर, “नशा नहीं, नयी सोच चाहिये।”
CM हेमंत सोरेन के सपने को जमीन देने उतरे स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारी ने प्रोजेक्ट भवन से नशा मुक्ति अभियान का शंखनाद किया। स्वास्थ्य विभाग, पुलिस प्रशासन, शिक्षा विभाग से लेकर मीडिया तक हर कोई इस मुहिम का हिस्सा बना। स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारी ने कहा कि “यह केवल 14 दिनों का आयोजन नहीं, यह 365 दिनों का संकल्प है।” डॉ अंसारी ने साफ कहा — झारखंड के हर गांव, हर स्कूल, हर युवा को नशे से बचाना है। इस दिशा में 4,000 से अधिक मेडिकल स्टोर में सीसीटीवी लग चुके हैं। बाकी दुकानों में भी यह जल्द पूरा होगा।
ड्रग्स माफियाओं को कड़ा संदेश
DGP अनुराग गुप्ता ने कहा, “ब्राउन शुगर, हेरोइन, गांजा, अफीम बेचने वाले अब जेल की सलाखों के पीछे होंगे। सप्लाई और डिमांड दोनों को तोड़ना ही लक्ष्य है।” सख्त शब्दों में अफीम की खेती को अपराध बताया गया। 27,000+ एकड़ में फैली अवैध खेती का विनष्टीकरण किया गया, यह झारखंड की बड़ी जीत है।
स्कूल-कॉलेज भी होंगे जागरूकता के केंद्र
शिक्षा सचिव राहुल पुरवार बोले, “हम बच्चों को चेतायेंगे, समझायेंगे, नशा कोई शौक नहीं, जीवन की बर्बादी है।” कैंपस और क्लासरूम से लेकर खेल मैदानों और पर्यटन स्थलों तक जागरूकता अभियान चलेगा। अपर मुख्य सचिव अजय कुमार ने कहा, “मीडिया नशा मुक्त अभियान का सबसे असरदार औजार है। जिन चेहरों पर अभी नकाब है, उन्हें उजागर करने की जिम्मेदारी आपकी है।” उन्होंने कहा, अब पुलिस-प्रशासन के साथ-साथ जनता को भी सक्रिय भूमिका निभानी होगी। अभिषेक आनंद (एनसीबी) ने बताया, “झारखंड का ड्रग विनष्टीकरण पूरे भारत में सबसे अधिक 20% है। यह गर्व की बात है।” डॉ सजल आशीष नाग ने कहा, “नशा शुरू तो होता है ‘मजे’ से, पर खत्म होता है ‘बर्बादी’ पर। रिनपास में इलाज की पूरी व्यवस्था है। समाज को साथ चलना होगा।”
एक साथ, एक संकल्प, एक लक्ष्य
इस कार्यशाला में सभी विभागों के सचिव, पुलिस अधिकारी, एनजीओ प्रतिनिधि और शिक्षक उपस्थित रहे। शपथ ली गई “हम झारखंड को नशा मुक्त बनायेंगे। नशे का सौदागर या तो सुधरेगा, या सीधा जेल जायेगा।” नशे के खिलाफ अब प्रशासन नहीं, समाज खड़ा है।












