Ranchi : झारखंड उच्च न्यायालय द्वारा 01 जुलाई 2025 को दिये गये आदेश के आलोक में, झारखंड ऊर्जा विकास श्रमिक संघ ने शुक्रवार को झारखंड ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। यह ज्ञापन निगम में वर्षों से कार्यरत आउटसोर्स तकनीकी एवं गैर-तकनीकी कर्मियों के अधिकारों और न्यूनतम वेतनमान को लेकर तैयार किया गया था। संघ के अध्यक्ष अजय राय ने बताया कि आउटसोर्स कर्मियों को न तो आज तक न्यूनतम वेतन मिल रहा है और न ही “समान कार्य के लिए समान वेतन” जैसे संवैधानिक अधिकारों का पालन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति न्यायालय की भावना और सामाजिक न्याय की मूल भावना के खिलाफ है।
ज्ञापन में प्रमुख रूप से 6 महत्वपूर्ण मांगें रखी गईं
न्यूनतम वेतनमान का तत्काल भुगतान और 2017 से लंबित एरियर की अदायगी।
स्थायी और संविदा कर्मियों के बीच वेतन असमानता को खत्म कर समानता सुनिश्चित की जाये।
भविष्य की बहालियों में आउटसोर्स कर्मियों को प्राथमिकता और आयु में छूट दी जाये।
सभी एजेंसियों को राज्य अधिसूचित न्यूनतम वेतन लागू करने हेतु लिखित आदेश जारी किया जाये।
एक स्वतंत्र निगरानी समिति गठित की जाये जो एजेंसियों के कार्यों पर निगरानी रखे।
कर्मियों के शोषण के विरुद्ध पारदर्शी शिकायत निवारण प्रणाली की स्थापना की जाये।
अजय राय ने स्पष्ट किया कि यदि निगम प्रशासन जल्द ही उचित और न्यायसंगत निर्णय नहीं लेता है, तो संघ राज्यव्यापी लोकतांत्रिक आंदोलन शुरू करेगा। उन्होंने इस मसले को सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि श्रमिकों की गरिमा और जीवन से जुड़ा संवेदनशील मुद्दा बताया। प्रतिनिधिमंडल में विजय सिंह, मुकेश साहू, अनिकेत कुमार, मुकेश यादव, रोशन लूगून, प्रवीण कुजूर, राम शरण प्रसाद, दीपेश यादव, रमेश चंद्र महतो, जगतपाल महतो, पिंटू सेन गुप्ता और सुनील सहाय शामिल थे।












