Ranchi : रांची की रात आज कुछ कह रही थी, खामोश, भारी और भीगती हुई सी। दिशोम गुरु शिबू सोरेन का पार्थिव शरीर जब मोरहाबादी स्थित आवास पहुंचा, तो यह केवल पार्थिव शव नहीं लौटा था, एक युग लौटकर विदा लेने आया था। मुख्य द्वार पर खड़े थे मंत्री, सांसद, विधायक, पूर्व मुख्यमंत्री और वरीय अधिकारी, पर उनकी आंखों में पद नहीं, सिर्फ़ श्रद्धा थी। हर किसी ने सिर झुकाया, मौन में शब्दों की गूंज थी “गुरुजी को नमन।”
देर रात तक आम लोग भी उमड़ते रहे चुपचाप, कतारबद्ध, नम आंखों से। हर चेहरा एक ही सवाल लिए था — अब कौन कहेगा, “मैं तुम्हारे बीच का हूं”… हजारों दीपकों जैसी आंखों ने उन्हें अंतिम बार देखा और उनके संघर्ष, तप और विश्वास को एक आखिरी बार अपने भीतर महसूस किया।













