Garhwa(Nityanand Dubey) : गढ़वा समाहरणालय आज सिर्फ दीवारों और कुर्सियों का दफ्तर नहीं रहा, बल्कि एक दरबार बना, जहां फरियादी अपनी उम्मीदें लेकर पहुंचे और DC दिनेश यादव ने उन्हें ध्यान से सुना। राशन, पेंशन, आवास, मजदूरी और भूमि विवाद, हर दर्द ने यहां आवाज पाई। भीड़ में कोई विधवा थी, कोई शिक्षक, कोई पीड़ित किसान। सबकी आंखों में एक ही सवाल था, “क्या हमारी सुनवाई होगी?” DC दिनेश यादव ने साफ कहा, “लोगों की समस्याओं का समाधान ही हमारी प्राथमिकता है।”
प्रमुख शिकायतें और फैसले
- पेंशन का दर्द: सेवानिवृत्त शिक्षक विनय शंकर पांडेय बीते दो माह से पेंशन के इंतजार में हैं। DC ने फौरन आदेश दिया, “कार्रवाई हो, अब और देर न हो।”
- आवास का अधूरा सपना: बरडीहा की खुशबून बीबी, परित्यक्ता और गरीब, जिनके पक्के मकान का पैसा झूठी शिकायत में फंसा हुआ था। DC ने कहा,“जांच होगी और हक की राशि तुरंत जारी की जाये।”
- शिक्षक का मानदेय: कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय के शिक्षकों की शिकायत थी कि 180 की जगह 150 रुपये का भुगतान हुआ। DC ने इसे गंभीर माना और कहा,“अन्याय खत्म होगा, सही हक मिलेगा।”
- जमीन पर कब्जा: कांडी की अर्चना देवी, जिनकी खरीदी जमीन पर दबंगों ने कब्जा कर लिया। उनकी आंखों में आंसू थे। DC ने पुलिस और अंचल को आदेश दिया, “जमीन खाली कराओ, दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो।”
- लापरवाह शिक्षक: सगमा के ग्रामीणों ने शिकायत की कि सहायक शिक्षक हरिदास यादव स्कूल छोड़ राजनीति और निजी क्लिनिक में लगे हैं। DC ने आदेश दिया,“जांच होगी और सच सामने आयेगा।”












