TRENDING : आज के दौर पारिवारिक जरूरतों को पूरा करने अथवा कुछ विशेष काम के लिए बैंक से लोन लेना पड़ता है। गौरतलब है कि पति या पत्नी दोनों की अपनी आमदनी, खर्चे होते हैं। ऐसे में अगर किसी को लोन लेना है तो उसके सामने यह सवाल आता है कि उसके स्पॉज यानी पति या पत्नी के क्रेडिट स्कोर से क्या इस पर कोई असर पड़ेगा। विशेषज्ञों की राय में पर्सनल खाते के आधार पर लोन अप्लाई करने पर Spouse यानी जीवनसाथी के क्रेडिट स्कोर को लोन देने का आधार नहीं बनाया जाता।
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कई तरह के दस्तावेज मांगती हैं कंपनियां
सुविधा चाहे जो है ,लोन के मामले में काफी मशक्कत करनी पड़ती है। कंपनियां कई तरह के दस्तावेज मांगती हैं। लोन लेने वाले पर्सन की सालाना आय, उसके CIBIL क्रेडिट स्कोर की बारीकी से जांच की जाती है। क्रेडिट स्कोर से किसी व्यक्ति की पूरी फाइनेंशियल हिस्ट्री का पता चल जाता है। अगर किसी का क्रेडिट स्कोर अच्छा है तो उसे बैंक या कंपनियां ब्याज दर में रियायत भी दे सकती हैं। अगर किसी का क्रेडिट स्कोर अच्छा नहीं है,तो उसे लोन देने में आनाकानी भी कर सकती हैं।
Spouse का क्रेडिट स्कोर
किसी भी व्यक्ति के मन में सवाल आ सकता है कि अगर वह होम लोन या किसी अन्य लोन के लिए अप्लाई कर रहा है तो क्या उसके Spouse का क्रेडिट स्कोर भी देखा जाएगा। क्या उसके स्पॉज का क्रेडिट स्कोर उसकी लोन एलिजिबिलिटी पर कोई असर डालेगा। जी नहीं, जानकारों का कहना है कि अगर आप जॉइंट लोन नहीं ले रहे, यानी किसी लोन के लिए इंडीविजुअल (व्यक्तिगत) रूप से आवेदन करना चाहते हैं तो बैंक के पास आपके Spouse के क्रेडिट स्कोर की जांच करने का कोई कारण नहीं है। लोन का आवेदन पूरी तरह से आपकी क्रेडिट मेरिट के आधार पर परखा जाएगा।
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Spouse की रेटिंग से बैंक को कोई मतलब नहीं
सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्लानर (CFP) और प्रमुख निवेश सलाहकार पंकज मठपाल कहते हैं, ‘अगर आप लोन अकेले अपने नाम पर ले रहे हैं तो बैंक या लोन देने वाली संस्था को आपके स्पॉज के क्रेडिट रेटिंग से कोई मतलब नहीं होगा। वह सिर्फ आपकी क्रेडिट रेटिंग को देखेगा। लेकिन अगर लोन दोनों के नाम से है तो जरूर आपके पति या पत्नी की क्रेडिट रेटिंग को भी ध्यान में रखा जाएगा।
ईएमआई का समय से भुगतान करना जरूरी
हमेशा यह कोशिश करनी चाहिए कि क्रेडिट स्कोर अच्छा रहे। इसके लिए आपको सभी तरह के लोन ईएमआई का समय से भुगतान करना चाहिए।.पंकज मठपाल कहते हैं, ‘जॉइंट होम लोन तभी फायदेमंद है जब पति और पत्नी दोनों कमा रहे हों। इससे ईएमआई का बोझ शेयर हो जाता है। बैंक भी ज्यादातर मामलों में ब्याज में रियायत तभी देते हैं, जब दोनों वर्किंग होते हैं। अगर आपके स्पॉज की कोई मंथली इनकम नहीं है, तो ज्यादातर मामलों में बैंक आपका लोन तो जॉइंट नाम से कर देंगे, लेकिन ब्याज दर में कोई रियायत नहीं देते।
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