Ranchi : कल तक जिस आंगन में रंग-गुलाल उड़ाने और सेल्फी लेने वालों का हुजूम दिखता था, वह आंगन फिलहाल सूना-सूना सा लगता है। पहली बार कल्पना सोरेन की होली फीकी होगी। पहली बार होली में उनके साथ पति हेमंत सोरेन संग नहीं होंगे। देवर, देवरानी और जेठानी की होली में उस गाने के बोल याद करा गई…”कोई हंसे तो कोई रोये।” घर की बड़ी बहू सीता सोरेन भाजपाई हो चुकी है। पति के संग नहीं रहने से कल्पना सोरेन बेहद दुखी हैं। वहीं, पूर्व CM हेमंत सोरेन रांची सेंट्रल जेल में बंद हैं। उनके जीवन की यह पहली होली होगी, जब वह अपनों से दूर होंगे। सीता सोरेन ने उस दहलीज को लांघा है, जिसकी हिमाकत आज तक परिवार का कोई सदस्य नहीं कर पाया। सबको अब बस एक ही इंतजार है कि चुनावी मैदान में सीता सोरेन प्रेम का रंग बिखरती है या नफरत…।
कुछ रोज पहले यानी अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के दिन बड़ी तादाद में महिलाएं कल्पना सोरेन से मिलने गईं थी। उनके आवास में सभी ने एक दूसरे को गुलाल लगाया था, लेकिन कल्पना सोरेन रंग से दूर रही। कल्पना सोरेन महिलाओं के साथ तस्वीर साझा करते हुये एक्स पर अपने मन की बात लिखी। उनका संदेश था कि “नारी तू अबला नहीं, स्वयं पहचान, अपने हक को लड़ स्वयं, तब होगा उत्थान”। अब वह लड़ और संघर्ष कर रही हैं। बहरहाल, ये तो साफ है कि सोरेन परिवार के एक धड़ा के लिए इस बार की होली बेरंग होगी तो एक परिवार के लिए रंगों से भरी।
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