Delhi : दिल्ली के हैदराबाद हाउस की रोशनी में भारत और रूस के झंडे हवा में साथ लहरा रहे थे, तभी दो पुराने दोस्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन एक बार फिर दुनिया को दिखा रहे थे कि दोस्ती अगर दिल से हो, तो दूरियां मायने नहीं रखतीं। दो दिवसीय दौरे पर आये पुतिन ने 23वें भारत-रूस शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया और फिर संयुक्त प्रेस वार्ता में ऐसी बातें कहीं, जिससे साफ महसूस हुआ, रूस, भारत का दोस्त नहीं परिवार है। पुतिन ने कहा कि भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था को रुकने नहीं देंगे। तेल हो, गैस हो, कोयला हो, जो भी ऊर्जा भारत को चाहिये, रूस बिना रुकावट देता रहेगा। यही नहीं, उन्होंने कहा, PM मोदी के साथ डिनर पर हुई बातचीत हमारी साझेदारी के लिए नई रोशनी बनकर आई है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, PM मोदी और भारत की जनता को दिल से धन्यवाद देते हुये पुतिन बोले, भारत का स्वागत, दिल को छू लेने वाला है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत-रूस डायलॉग अब सिर्फ औपचारिकता नहीं, दो दोस्तों का गहरा भरोसा है। पुतिन ने कहा, ऊर्जा के हर मोर्चे पर रूस, भारत के साथ खड़ा है। गुजरे 50 सालों की साझेदारी याद करते हुये राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि भारत की सेना को आधुनिक हथियार देते रहेंगे। विमानन से लेकर नौसेना तक सहयोग और आगे असंख्य संभावनायें हैं, हमारी बातचीत के नतीजे शानदार हैं। यह दौरा रिश्ते और गहरा करेगा। कुडनकुलम में देश का सबसे बड़ा परमाणु संयंत्र छह में से दो रिएक्टर चल रहे, चार बन रहे हैं। पूरा प्लांट चलने पर भारत के घरों और उद्योगों में और भी सस्ती, साफ बिजली बहेगी। वहीं, छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर, फ्लोटिंग न्यूक्लियर प्लांट और मेडिकल-एग्रीकल्चर वाली न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी पर भी बातचीत आगे बढ़ी।
साझेदारी के नये अध्याय
- 96% व्यापार अब राष्ट्रीय मुद्राओं में—डॉलर को पीछे छोड़, रिश्ते और मजबूत।
- 100 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार का बड़ा लक्ष्य।
- तेल, गैस, कोयले में सहयोग पहले से भी ज्यादा मजबूत।
व्यापार के नये रिकॉर्ड
- पिछले साल भारत-रूस व्यापार 12% बढ़ा
- औसतन लगभग 64 बिलियन डॉलर
- लक्ष्य—100 बिलियन डॉलर
क्या कुछ लेन-देन होता… जानें
रूस से भारत: 76% कच्चा तेल। बाकी गैस, कोयला और ऊर्जा उत्पाद
भारत से रूस: दवाइयां, केमिकल्स, चाय, कॉफी, चावल, मसाले, कपड़ा और अन्य उत्पाद






