Garhwa(Nityanand Dubey) : गढ़वा समाहरणालय सभागार का माहौल उस वक्त बिल्कुल बदल गया, जब झारखंड सरकार के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के प्रधान सचिव मस्त राम मीणा ने मंच से ही अधिकारियों को कठोर शब्दों में चेतावनी दे डाली। कारण था – जल जीवन मिशन और स्वच्छ भारत मिशन की सुस्त रफ्तार। बैठक में जब आंकड़े सामने आये तो प्रधान सचिव ने नाराजगी जताते हुये कहा, “यह मिशन सिर्फ योजना नहीं, गांव-गांव की प्यास और उम्मीदों का सवाल है। समय पर नल नहीं पहुंचा तो भरोसा टूटेगा।” प्रधान सचिव ने आदेश दिया कि हर घर को समय पर FHTC मिले। जल की गुणवत्ता पर कोई समझौता न हो। लापरवाह संवेदकों और अभियंताओं पर कार्रवाई तय है।
इन मुख्य बिंदुओं पर समीक्षा
- फंक्शनल हाउसहोल्ड टैप कनेक्शन (FHTC) – हर घर तक नल पहुंचाने की रफ़्तार धीमी।
- ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति (VWSC) – कई गांवों में गठन अधूरा।
- जल सहिया द्वारा पानी की जांच – नियमित परीक्षण में लापरवाही।
- जियो टैगिंग – काम अधूरा छोड़ने पर चेतावनी।
पानी की पवित्रता पर जोर
प्रधान सचिव ने कहा कि “जल जीवन मिशन का मकसद सिर्फ पाइप बिछाना नहीं, बल्कि हर ग्रामीण परिवार तक शुद्ध और सुरक्षित पानी पहुंचाना है। पानी में गड़बड़ी पाई गई तो जिम्मेदार पर तुरंत कार्रवाई होगी।” मीणा ने दोहराया कि इन योजनाओं की सफलता तभी संभव है जब गांव का हर व्यक्ति जुड़कर काम को पारदर्शी बनाये। “काम की गति तेज हो, जवाबदेही तय हो और जनता को साफ पानी मिले, यही असली उपलब्धि होगी।” बैठक के अंत में DC दिनेश कुमार यादव ने प्रधान सचिव समेत अभियान निदेशक रमेश घोलप और निदेशक मनोहर मरांडी को शॉल और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। सभा में मौजूद अधिकारियों ने भी माना कि अब काम की रफ्तार बढ़ाना ही सबसे बड़ी प्राथमिकता है।












