Ranchi : अधिवक्ता परिषद, झारखंड का नौ सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल प्रदेश अध्यक्ष राजेन्द्र कुमार मिश्र के नेतृत्व में गर्वनर संतोष गंगवार से राजभवन में मिले। इस दौरान, प्रतिनिधिमंडल ने “एकान्टिबिलिटी ऑफ इंडिपेंडेंट ज्यूडिशियरी” विषयक प्रस्ताव की प्रति समर्पित की। वहीं, इस प्रस्ताव को राष्ट्रपति और भारत के मुख्य न्यायाधीश को प्रेषित करने का अनुरोध भी किया। यह प्रस्ताव अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद द्वारा 13 अप्रैल 2025 को विजयवाड़ा, आंध्र प्रदेश में आयोजित राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक में पारित किया गया था। प्रस्ताव की प्रति हासिल करते हुये गर्वनर संतोष गंगवार ने खुशी जताते हुये प्रस्ताव पर उचित कार्यवाही का आश्वासन दिया।
प्रतिनिधिमंडल में झारखंड बार काउंसिल के अध्यक्ष राजेन्द्र कृष्ण, उच्च न्यायालय इकाई के अध्यक्ष व वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल कुमार कश्यप, प्रशान्त विद्यार्थी, रीतेश कुमार बाॅबी, कृष्ण गोपाल निताई, किरण सुषमा खोया, राधाकृष्ण गुप्ता और रोमित कुमार शामिल थे। इस दौरान, प्रतिनिधि मंडल ने राज्य के सभी अनुमंडल पदाधिकारियों, उपायुक्तों और आयुक्तों को प्रस्ताव की प्रतियां ज्ञापन स्वरूप दीं। यह जानकारी झारखंड अधिवक्ता परिषद के प्रांत मीडिया सह प्रमुख रीतेश कुमार बॉबी के द्वारा दी गई।
प्रस्ताव की प्रमुख मांगें
- न्यायिक सेवा में नियुक्ति को पारदर्शी बनाने के लिये नया विधेयक लाया जाये।
- सर्वोच्च न्यायालय के कार्यों की निगरानी के लिये स्थायी समिति बनाई जाये, जिसमें पूर्व मुख्य न्यायाधीश, उच्च न्यायालय के न्यायाधीश और सम्मानित व्यक्तियों को शामिल किया जाये।
- उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के रिश्तेदार और परिवार के सदस्य जहां वकालत करते हों, वहां से उनका स्थानांतरण किया जाये।
- सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय के न्यायाधीश और उनके परिवार के सदस्य, अपनी सम्पत्तियों का विवरण प्रत्येक वर्ष वेबसाइट पर डालें।
- प्रत्येक उच्च न्यायालय में कम से कम एक तिहाई न्यायाधीश दूसरे उच्च न्यायालय से हों।










