दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट में ब्लैकमेल कर रेप करने की दायर एक याचिका में आरोपी को सिर्फ एक टैटू की वजह से बेल मिल गया। दायर याचिका के मुताबिक आरोपी युवक संजय 2016 से 2019 तक पीड़िता को ब्लैकमेल कर रेप करता रहा। पीड़िता की शिकायत के बाद आरोपी संजय को गिरफ्तार कर लिया गया था। जिसके बाद वह जेल में ही बंद था। दिल्ली हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान आरोपी ने अपने उपर लगे आरोपों बेबुनियाद बताया। उसने कहा कि हम दोनों में जो कुछ भी हुआ हम दोनों की सहमति से हुआ है।
इसके बाद युवक ने जो बताया वह उसके जमानत की वजह बन गई। उसकी बातों से जज भी सहमत हो गए। आरोपी ने कहा कि अगर कोर्ट को उसके दलील पर यकीन ना हो तो पीड़िता की बाजू पर देख लें, वहां उसके नाम का परमानेंट टैटू बना हुआ है। यह टैटू हमारे प्रेम कहानी को बयां करता है। पीड़िता ने खुद ही टैटू बनवाया और मुझे ईमेल के जरिए भेजा और बोली तुम भी सेम ऐसा ही टैटू बनवाओ। जब जांच हुई तो आरोपी को ही सच माना गया और पीड़िता के खिलाफ कोई भी सबूत नहीं मिला जिसे पीड़िता खुद को सही साबित कर सके।
जस्टिस रजनीश भटनागर इस कदर संतुष्ट हुए कि आरोपी को जमानत पर जेल से बाहर करने का आदेश जारी कर दिया। वो भी 25 हजार रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही रकम के जमानती पेश करने की शर्त पर।
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जस्टिस भटनागर ने अपने आदेश में लिखा
टैटू बनाना कला है। इतना सही टैटू दबाव में या विरोध करते हुए नहीं बनाया जा सकता है। विशिष्ट उपकरण से विशिष्ट परिस्थितियों में आराम से बनवाया गया है। ये परफेक्ट टैटू है। पीड़िता की दलील थी कि उसे एक घर में नजरबंद करके रखा गया था, लेकिन मकान मालिक ने बताया कि पीड़िता ने ये कहकर कमरा किराए पर लिया था कि वो अकेली रहेगी।
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