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झारखंड जगुआर की 18 साल की गाथा, “जीत ही लक्ष्य” का जज्बा…

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Ranchi : झारखंड की धरती पर गुरुवार की सुबह कुछ अलग थी, हवा में गर्व था, आंखों में चमक और दिलों में शौर्य का संगीत। मौका था झारखंड जगुआर के 18वें स्थापना दिवस का, जहां वीरता और समर्पण की गाथा फिर से जीवंत हो उठी। वर्ष 2008 में वामपंथी उग्रवाद के खात्मे के संकल्प के साथ बना यह विशेष बल आज राज्य की सुरक्षा का सशक्त प्रहरी बन चुका है। रांची के टेन्डर ग्राम स्थित मुख्यालय में पूरे उत्साह और उमंग के साथ कार्यक्रम आयोजित हुआ, जहां मुख्य अतिथि DGP तदाशा मिश्र ने भव्य परेड की सलामी ली। कमांडो दस्ते ने नक्सल विरोधी ऑपरेशन का शानदार प्रदर्शन किया। जवानों के कदमताल में अनुशासन, आंखों में अदम्य विश्वास दिखा। समारोह में मौजूद हर शख्स ने गर्व से भरी तालियों से हौसला बढ़ाया। जंगलों की खामोशी हो या पहाड़ों की चुनौती, जगुआर की टीम ने हर मोर्चे पर अपने साहस का परचम लहराया है।

18 साल का सफर: बलिदान और बहादुरी की मिसाल

उग्रवाद उन्मूलन अभियान में 24 वीर जवानों ने सर्वोच्च शहादत दी। 303 नक्सलियों की गिरफ्तारी हुई, वहीं, 50 दुर्दांत उग्रवादी मुठभेड़ में ढेर हो गये। पारसनाथ, सारंडा, बूढ़ा पहाड़, कोल्हान जैसे दुर्गम इलाकों में निर्णायक कार्रवाई की गई।समारोह में शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुये DGP तदाशा मिश्रा ने कहा कि इन वीर जवानों का बलिदान राज्य में शांति और विकास की मजबूत नींव है। सारंडा के घने जंगलों से लेकर पारसनाथ की ऊंची पहाड़ियों तक सक्रिय अभियान चलाया।
संयुक्त बलों के साथ मिलकर नक्सल हिंसा में उल्लेखनीय कमी आई। “जीत ही लक्ष्य” के आदर्श वाक्य को चरितार्थ करता हर जवान  आज भी जगुआर की टीमें चाईबासा के सारंडा क्षेत्र में माओवादियों के खिलाफ सघन अभियान चला रही हैं।

सम्मान, सेवा और समर्पण की परंपरा

झारखंड जगुआर के अफसरों और जवानों को राष्ट्रपति से 68 सराहनीय सेवा पदक मिले, 17 वीरता पदक समेत कई सम्मान झटके। गृह मंत्रालय और राज्य सरकार से दर्जनों उत्कृष्ट सेवा और ऑपरेशन पदक मिले। स्थापना दिवस पर शहीदों के परिजनों को सम्मान और रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में IG अनूप बिरथरे ने कहा कि चाहे पारसनाथ की चोटी हो या सारंडा का जंगल, झारखंड जगुआर ने हर चुनौती को अपने साहस से मात दी है। उन्होंने कहा कि  गिरोह और प्रतिबंधित संगठनों के खिलाफ सख्त अभियान जारी रहेगा। राज्य को पूरी तरह नक्सल मुक्त बनाने का लक्ष्य है। संयुक्त पुलिस व अर्द्धसैनिक बलों की रणनीति से सुरक्षा मजबूत होती है। समारोह के अंत में जगुआर के DIG इन्द्रजीत माहथा ने सभी अतिथियों का आभार जताया।

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