Kohramlive : जब धरती सो रही थी, तब भारत के वैज्ञानिक तारों के बीच एक ऐसी कहानी लिख रहे थे, जिसे अंतरिक्ष विज्ञान के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज किया जायेगा। राजस्थान के माउंट आबू स्थित भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (PRL) की 1.2 मीटर दूरबीन ने वह कर दिखाया, जिसका इंतजार दुनिया भर के खगोल वैज्ञानिक कर रहे थे। विदेशी धूमकेतु 3I/ATLAS (C/2025 A11)—हां, वही धूमकेतु (जो हमारे सौरमंडल का निवासी नहीं है) की पहली अद्भुत तस्वीरें और स्पेक्ट्रम भारत ने सफलतापूर्वक रिकॉर्ड कर लिया है।
आसमान में चमकी ‘बाहरी मेहमान’ की पहली झलक
PRL द्वारा ली गई तस्वीरों में धूमकेतु के चारों तरफ एक उजला, गोल कोमा बिल्कुल साफ नजर आता है, जैसे किसी ब्रह्मांडीय फूल की चमकती पंखुड़ियां अंतरिक्ष में खिल उठी हों। धूल की पूंछ इस समय सूरज की तरफ है, इसलिये पृथ्वी से दिखाई नहीं दे रही, लेकिन वैज्ञानिकों के मुताबिक उसकी सक्रियता काफी तेज है।
स्पेक्ट्रम ने खोले रहस्य
वैज्ञानिकों ने लगातार तीन दिनों तक धूमकेतु का स्पेक्ट्रम लिया और जो सामने आया वह चौंकाने वाला था, स्पेक्ट्रम में CN, C₂ और C₃ की लाइनों की स्पष्ट मौजूदगी मिली। यानी यह “विदेशी धूमकेतु” भी हमारे सौरमंडल के सामान्य धूमकेतुओं जैसा ही है। और तो और यह हर सेकंड 10¹⁰²⁵ अणु गैस उगल रहा है। एक तरह से यह अंतरिक्ष में एक चमकता हुआ, सांस लेता हुआ आग का पहाड़ है। PRL की टीम अब रात में और भी गहरी, विस्तृत तस्वीरें लेने की तैयारी में है। इनसे ये पता चल सकेगा कि दूसरे तारों से आये धूमकेतुओं का ‘DNA’ हमारे सौरमंडलीय धूमकेतुओं से कितना मिलता-जुलता है। माउंट आबू की 1.2 मीटर दूरबीन पहले से ही एक्सोप्लैनेट, ब्लैक होल और सौरमंडल की वस्तुओं का अध्ययन करती रही है। लेकिन विदेशी धूमकेतु का यह अवलोकन, भारत की अंतरिक्ष क्षमता का नया कीर्तिमान है।






