Ranchi : राजधानी रांची में स्वाइन फ्लू के मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। नये सिविल सर्जन के रूप में 1 अगस्त को पदभार संभालने वाले डॉ. अमरेंद्र प्रसाद ने शनिवार को जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था और अपनी भावी कार्ययोजना को लेकर मीडिया से बातचीत की। स्वाइन फ्लू की स्थिति पर उन्होंने कहा कि फिलहाल संक्रमण गंभीर या जानलेवा स्थिति में नहीं है और संक्रमित मरीजों का प्रबंधन होम आइसोलेशन में किया जा रहा है। हालांकि, आपात स्थिति से निपटने के लिये सदर अस्पताल में 10 बेड का विशेष आइसोलेशन वार्ड तैयार कर लिया गया है।
11 संदिग्धों की जांच, 8 में संक्रमण की पुष्टि
सिविल सर्जन के अनुसार अब तक 11 संदिग्ध मरीजों की जांच कराई गई है। उपलब्ध रिपोर्ट में 8 लोगों के संक्रमित पाये जाने की बात कही गई है। हालांकि, उन्होंने यह भी बताया कि वर्तमान में मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराने की जरूरत नहीं पड़ी है। संक्रमित मरीजों का इलाज और निगरानी होम आइसोलेशन में ही की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग का फोकस फिलहाल स्थिति पर नजर बनाये रखने और किसी भी संभावित आपात स्थिति के लिये अस्पताल को तैयार रखने पर है।
सदर अस्पताल को हाईटेक बनाने का रोडमैप तैयार
पदभार संभालने के बाद डॉ. अमरेंद्र प्रसाद ने जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर अपना 6-6 महीने का विजन प्लान भी तैयार किया है। उनकी योजना सदर अस्पताल में आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार करने की है। इसमें, कैथ लैब (Cath Lab), PET Scan, टेली ICU/टेली एसेंशियल्स, बोन मैरो ट्रांसप्लांट जैसी सुविधाएं शुरू करने की योजना शामिल है। सिविल सर्जन ने कहा कि सदर अस्पताल को बेहतर बनाने के लिये वे उपाधीक्षक के साथ टीम भावना से काम कर रहे हैं। ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करना भी प्राथमिकता में है। डॉ. अमरेंद्र प्रसाद के मुताबिक CHC और PHC की स्थिति सुधारने के लिये दिसंबर तक जिले के सभी स्वास्थ्य केंद्रों का गहन निरीक्षण किया जायेगा। निरीक्षण के दौरान स्वास्थ्य केंद्रों में मौजूद कमियों की पहचान कर उन्हें दूर करने की दिशा में काम होगा। इनमें डिजिटल एक्स-रे सहित जरूरी बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता पर भी जोर दिया जायेगा।
निजी अस्पतालों के लाइसेंस की होगी समीक्षा
निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली और लाइसेंस से जुड़ी शिकायतों पर भी सिविल सर्जन ने सख्त रुख दिखाया। उन्होंने कहा कि पुरानी व्यवस्था की समीक्षा कर उसे बेहतर और पारदर्शी बनाया जाएगा, ताकि भ्रष्टाचार की किसी भी संभावना को खत्म किया जा सके। मीडिया के माध्यम से सामने आई क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत लाइसेंस नवीनीकरण और पेनाल्टी बैकलॉग से जुड़ी समस्याओं का भी संज्ञान लिया गया है। इसके लिये जल्द स्पष्ट प्रोटोकॉल तैयार कर समीक्षा की जायेगी और नियमों के तहत कार्रवाई करते हुये लंबित समस्याओं के स्थायी समाधान की कोशिश होगी। सिविल सर्जन ने जिले की एंबुलेंस सेवाओं से जुड़ी चुनौतियों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के सहयोग से इन समस्याओं को जल्द दूर करने की दिशा में काम किया जाएगा।
मीडिया पर रोक नहीं
सदर अस्पताल परिसर में मीडिया की आवाजाही को लेकर भी सिविल सर्जन ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि मीडिया पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। अस्पताल में बनाई गई व्यवस्था का उद्देश्य मरीजों को संक्रमण से बचाना और इंफेक्शन कंट्रोल को मजबूत करना है। उनके मुताबिक ICU, HDU और अन्य संवेदनशील वार्डों में कैमरा और पत्रकारों की आवाजाही से संक्रमण का जोखिम बढ़ सकता है। इसलिये उन्होंने मीडियाकर्मियों से अपील की कि इमरजेंसी वार्ड के बाहर या गैलरी में बाइट और इंटरव्यू लिया जाये। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मास्क पहनने और संवेदनशील वार्डों में अनावश्यक प्रवेश से बचने की व्यवस्था केवल मीडिया के लिये नहीं है। यह नियम मरीजों से मिलने आने वाले परिजनों और आम लोगों पर भी समान रूप से लागू है।







