Kohramlive : छत्तीसगढ़ के रायपुर में आयोजित प्रदेश स्तरीय बुनकर सम्मेलन एवं स्वदेशी प्रदर्शनी में पहली बार सरेंडर महिला नक्सलियों ने प्रोफेशनल मॉडल की तरह रैंप वॉक किया। बस्तर की इन बेटियों ने कोसा सिल्क और पारंपरिक हथकरघा परिधानों में आत्मविश्वास की नई कहानी लिख दी। कार्यक्रम में शामिल महिलाओं में कई ऐसी थीं जो कभी सुकमा के नक्सली संगठन में सक्रिय रहीं। कुछ महिला कमांडरों की गनमैन थीं, तो एक ने नक्सलियों के ‘जनता सरकार’ स्कूल में शिक्षिका के रूप में भी काम किया था। आत्मसमर्पण के बाद अब वे सम्मानजनक जीवन और रोजगार की राह पर हैं।
तालियों से हुआ स्वागत, CM ने बढ़ाया हौसला
CM विष्णुदेव साय ने रैंप वॉक करने वाली महिलाओं से मुलाकात कर उन्हें बधाई दी। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य आत्मसमर्पित नक्सलियों को मुख्यधारा से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाना और छत्तीसगढ़ के हथकरघा उत्पादों को ‘लोकल टू ग्लोबल’ पहचान दिलाना है। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री ने रेशम, हथकरघा, हस्तशिल्प, खादी और माटीकला से जुड़े हितग्राहियों तथा मेधावी छात्र-छात्राओं को 10.90 करोड़ रुपये से अधिक की अनुदान और पुरस्कार राशि वितरित की। यह आयोजन बदलते बस्तर और पुनर्वास की नई सोच का प्रतीक बन गया।
Naxal path → Ramp walk🔥🔥
Former women cadres from Bastar just owned the runway at Raipur’s National Handloom Day event after joining the mainstream.
Applause well earned. pic.twitter.com/ECo1cGB7Cq
— Mr Tiwaree 💀 (@MrTiwaree) August 13, 2026






















