Kohramlive : चुनाव के समय मुफ्त योजनाओं की घोषणा को लेकर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस एनवी रमना की बेंच में सुनवाई हुई। कोर्ट ने रूष्ट किया, हम यह तय करेंगे कि चुनावी घोषणा में फ्री स्कीम्स क्या हैं। 20 अगस्त तक सभी पक्षों को रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा गया है। मामले में अगली सुनवाई 22 अगस्त को होगी।
राजनीतिक दलों को वादा करने से नहीं रोका जा सकता
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने कहा कि क्या हम किसी पॉलिटिकल पार्टी को किसानों को खाद देने से रोक सकते हैं,सबको शिक्षा और स्वास्थ्य देने पर अमल करना सार्वजनिक धन का दुरुपयोग नहीं है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों को लोगों से वादा करने से नहीं रोका जा सकता। सवाल इस बात का है कि सरकारी धन का किस तरह से इस्तेमाल किया जाए।
फ्री स्कीम्स का मनरेगा बेहतरीन उदाहरण
चीफ जस्टिस ने सुनवाई के दौरान फ्री स्कीम्स का मनरेगा का सबसे बेहतरीन उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि इस स्कीम्स से लाखों लोगों को रोजगार मिल रहा है, मगर यह वोटर को शायद ही प्रभावित करता है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पूछा कि मुफ्त में वाहन देने की घोषणा कल्याणकारी उपायों के रूप में देखा जा सकता है,क्या हम कह सकते हैं कि शिक्षा के लिए मुफ्त कोचिंग फ्री स्कीम्स हैं।
चुनाव आयोग ने परिभाषा तय करने की मांग की थी
11 अगस्त को सुनवाई से पहले चुनाव आयोग ने हलफनामा दाखिल किया था। आयोग ने कोर्ट में कहा है कि फ्री का सामान या फिर अवैध रूप से फ्री का सामान की कोई तय परिभाषा या पहचान नहीं है। आयोग ने 12 पन्नों के अपने हलफनामे में कहा कि देश में समय और स्थिति के अनुसार फ्री सामानों की परिभाषा बदल जाती है।ऐसे में विशेषज्ञ पैनल से हमें बाहर रखा जाए। हम एक संवैधानिक संस्था हैं और पैनल में हमारे रहने से फैसले को लेकर दबाव बनेगा। कोर्ट ही इस पर दिशा-निर्देश जारी कर दें।
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