New Delhi : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना वाली सोशल मीडिया पोस्ट के मामले में बेंगलुरु निवासी गुरुदत्त शेट्टी को सुप्रीम कोर्ट से कोई राहत नहीं मिली। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची, न्यायमूर्ति विपुल एम. पांचोली की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुये दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने से इनकार कर दिया। गुरुदत्त शेट्टी पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत धारा 336(4), धारा 79 के तहत संज्ञेय और जमानती अपराध का केस दर्ज है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि पोस्ट का मकसद प्रधानमंत्री की छवि को नुकसान पहुंचाना था। पीठ ने साफ कहा कि “याचिकाकर्ता ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का दुरुपयोग किया है।” अदालत ने स्पष्ट किया कि इस स्तर पर कोई विवेकाधीन राहत नहीं दी जा सकती, हालांकि, शेट्टी उच्च न्यायालय में अपील कर सकते हैं। शेट्टी के वकील ने 7 दिन की गिरफ्तारी से सुरक्षा की मांग की, लेकिन अदालत ने इसे भी सिरे से खारिज कर दिया।
माफी की पेशकश, पर अदालत संतुष्ट नहीं
वकील ने दलील दी कि शेट्टी माफी मांगने को तैयार हैं, उन्होंने पोस्ट सिर्फ रीपोस्ट की थी, वे मूल लेखक नहीं हैं। लेकिन अदालत की टिप्पणी तल्ख थी, “याचिकाकर्ता ने अपनी कार्रवाई पर कोई पश्चाताप या माफी नहीं दिखाई।” शेट्टी की ओर से दावा किया गया कि 10 नवंबर को गुजरात पुलिस बिना वारंट उनके घर पहुंची जबरन कार में बैठाकर जांच अधिकारी के सामने पेश किया। अदालत ने इस बिंदु पर मामले को उच्च न्यायालय में सुनवाई के लिये भेजे जाने की संभावना की ओर इशारा किया।














