Ranchi : रांची की गलियों में, कपड़ों से भरे एक ठेले की खटखटाहट के बीच एक सपना धीरे-धीरे आकार ले रहा था। ठेले को खींचते अब्दुल रहमान की आंखों में संघर्ष था और उनकी बेटी तहरीन फातिमा की आंखों में सितारे। वो सुबह कुछ खास थी। आज रांची के हर जुबां पर एक नाम है, “तहरीन फातिमा”। वही तहरीन, जिसने मैट्रिक जैक बोर्ड परीक्षा में 97.4% अंक लाकर रांची जिले में टॉप किया और पूरे राज्य में पांचवें पायदान पर थी। तभी सरकारी भवन के गलियारे में एक कद्दावर आवाज गूंजी, “बेटी, आगे क्या करना चाहती हो?” ये सवाल किसी और का नहीं, रांची के DC मंजूनाथ भजन्त्री का था। सामने खड़ी थी एक दुबली-पतली लड़की, आंखों में आत्मविश्वास और मुस्कान में जीत की चमक। “सर, इंजीनियरिंग करना चाहती हूं और फिर UPSC देकर IAS बनना है।”
DC भजन्त्री ने मंच से ऐलान किया “बेटियों को पढ़ाना ही असली ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ है। मुख्यमंत्री जी की दूरदर्शी सोच यही है, हर बेटी सशक्त हो, स्वावलंबी हो।” उन्होंने शिक्षा विभाग को निर्देश दिया कि “तहरीन जैसे होनहारों के लिये योजनाओं का लाभ तय समय पर पहुंचे, ताकि ये उड़ान कभी थमे नहीं।” शाम ढलने लगी थी। कार्यक्रम समाप्त हो चुका था। मगर तहरीन की आंखों में अब भी सूरज चमक रहा था, उम्मीद का, सफलता का और उस भविष्य का, जहां वो किसी दिन खुद भी उपायुक्त बन कर खड़ी होगी, किसी और ‘तहरीन’ से पूछेगी, “बेटी, आगे क्या करना चाहती हो?”
कुछ पल के लिए वक्त थम सा गया। उस हॉल में बैठे हर शख्स के दिल में एक टीस और ताली बजाने का मन एक साथ जगा। ये कोई आम जवाब नहीं था, ये उस समाज को जवाब था, जो अक्सर बेटियों के ख्वाबों को दो गज जमीन से ज्यादा नहीं समझता। DC साहेब ने तहरीन को मोमेंटो दिया, उसके माता-पिता को शॉल ओढ़ाया, और जैसे ही अब्दुल रहमान की आंखें अपनी बेटी को मंच पर देख कर भीग गईं, किसी ने हौले से कहा, “देखो… ठेलेवाले की बेटी आसमान छू आई…” तहरीन के साथ मंच पर थीं उसकी शिक्षिकाएं सिस्टर विक्टोरिया, सिस्टर सुनीता लकड़ा और शिक्षक एंथनी तिग्गा। ये वो लोग थे जिन्होंने तहरीन की किताबों में उसके सपनों के रंग भरे।






