कोहराम लाइव डेस्क : संत तुलसीदास ने लिखा है- करमहीन नर पावत नाहिं। मतलब स्पष्ट है कि जो कर्म नहीं करेगा, वह कुछ पा नहीं सकता, बल्कि पाया हुआ भी खो देगा। जो कर्म नहीं करता, वह आलसी है। जो आलसी है, वह न अपने धन की रक्षा कर सकता है, न अपनी सेहत की। कहने का अर्थ यह है कि आलस धन हानि तो कराता ही है, सेहत भी बिगाड़ देता है। इससे जुड़े उपदेश को हम एक कथा के माध्यम से बेहतर तरीके से समझ सकते हैं।
आलसी धनी सेठ
कथा के अनुसार पुराने समय में एक धनी सेठ बहुत आलसी था। उसने हर काम के लिए नौकर रख लिए थे। वह दिनभर पलंग पर आराम करता और खाता-पीता रहता था। शारीरिक मेहनत न होने की वजह से धीरे-धीरे उसका मोटापा बढ़ने लगा, लेकिन उसने ध्यान नहीं दिया।
मोटापे के साथ बीमारियां आईं
मोटापे के साथ उसे कई बीमारियां भी हो गईं। सेहत खराब रहने लगी। घर के नौकरों को भी मालूम था कि मालिक आलसी है तो उन्होंने भी बेईमानी करना शुरू दी। अब उस धनी आदमी को स्वास्थ्य के साथ ही पैसों का भी नुकसान होने लगा था।
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मिलने दोस्त आया
एक दिन उसका दोस्त मिलने के लिए आया। घर आया दोस्त जानता था कि ये व्यक्ति बहुत आलसी है। उसने देखा कि धनी सेठ बीमार है। सेठ ने मित्र से इन परेशानियों को दूर करने का उपाय पूछा। मित्र समझदार था, उसने कहा कि उपाय तो है, लेकिन तुम वह कर नहीं सकोगे। सेठ बोला कि मैं ठीक होने के लिए कुछ भी करूंगा, तुम उपाय बताओ।
सुनहरे पक्षी का दर्शन
मित्र ने कहा कि रोज सुबह अपने गांव में एक सुनहरा पक्षी आता है। तुम्हें रोज सुबह उसके दर्शन करना है। उसके दर्शन करने से तुम्हारी समस्याएं खत्म हो जाएंगी। अगले दिन सेठ सुबह जल्दी उठा और घर से बाहर निकलकर सुनहरे पक्षी को खोजने लगा। उसने देखा की एक नौकर उसका अनाज चोरी करके बेच रहा है। जबकि दूसरा नौकरी दूध में पानी मिला रहा है। सेठ दोनों नौकरों पर गुस्सा हो गया और समझाया कि आगे से ऐसे गलत काम किए तो नौकरी से निकाल देगा। उस दिन उसे सुनहरा पक्षी दिखाई नहीं दिया।
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अगले दिन सुबह सेठ फिर उठ गया और पक्षी को खोजने के लिए निकल पड़ा। अब रोज सेठ सुबह-सुबह जल्दी उठकर पक्षी को खोजने निकल पड़ता था। सुबह जल्दी उठने और शारीरिक मेहनत से उसकी सेहत सुधरने लगी। नौकरी भी सेठ को देखकर ईमानदारी से काम करने लगे थे। इस तरह सेठ का स्वास्थ्य भी ठीक हो गया और पैसों से जुड़ी समस्याएं भी दूर हो गईं।
मित्र फिर मिलने आया
एक दिन सेठ का मित्र वापस मिलने के लिए आया तो सेठ ने कहा कि मित्र तुमने तो कहा था कि सुनहरा पक्षी रोज गांव में आता है। मैं कई दिनों से रोज उसे देखने जा रहा हूं, लेकिन वह दिखाई नहीं दिया। मित्र ने कहा कि जब से तुमने सुबह जल्दी उठकर घूमना शुरू किया है, तुम्हारी सेहत ठीक हो गई है और नौकर भी ईमानदारी से काम करने लगे हैं। तुम्हारी जीवन शैली सुधर गई है। यही वह सुनहरा पक्षी है, जिसने तुम्हारा जीवन बदल दिया है।
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