कोहराम लाइव डेस्क: आज महाशिवरात्रि यानी भगवान शिव का दिन। शिव औघड़दानी हैं। उन्हें खुश कर शिवभक्त कोई भी वरदान मांग सकते हैं। शिवजी को शीतलता भाती है, इसलिए उन्हें खुश रखने के लिए जल, दूध और दही से उनका अभिषेक किया जाता है। भांग, धतूरा और बेलपत्र की तासीर भी शीतल है, इसलिए बाबा इन चीजों को पसंद करते हैं और भक्त बाबा पर इन्हें अर्पित करते हैं।
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जलाभिषेक को रूद्राभिषेक भी कहा जाता है
शिवजी का एक नाम रुद्र भी है, इसीलिए जलाभिषेक को रुद्राभिषेक भी कहा जाता है। तांबे के लोटे से शिवलिंग पर जल की धारा अर्पित की जाती है। शिवलिंग पर जल क्यों चढ़ाते हैं, इस संबंध में समुद्र मंथन की कथा प्रचलित है।

इस प्रकार भगवान शिव बन गए नीलकंठ
समुद्र मंथन से जुड़ी कथा के अनुसार, प्राचीन समय में जब देवता और दानवों ने मिलकर समुद्र मंथन किया था, तब कई रत्न निकले थे। इन रत्नों से पहले हलाहल नाम का भयंकर विष निकला था। इस विष की वजह से पूरी सृष्टि के सभी जीवों के प्राण संकट में पड़ गए थे। तब शिवजी ने ये विष पी लिया था, लेकिन इस विष को उन्होंने गले से नीचे नहीं जाने दिया। इस कारण शिवजी का गला नीला हो गया और इन्हें नीलकंठ कहा जाने लगा।
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विष से उत्पन्न जलन दूर करने के लिए चढ़ाया जाने लगा जल
विष पीने की वजह से शिवजी के शरीर में तेज जलन होने लगी, गर्मी बढ़ने लगी। इस तपन से मुक्ति के लिए शिवजी को ठंडा जल चढ़ाने की परंपरा शुरू हुई है। भोलेनाथ को ठंडक देने वाली चीजें ही विशेष रूप से चढ़ाई जाती हैं, ताकि विष के गर्मी शांत रह सके।

जल चढ़ाते समय शिव मंत्रों का करें जाप
शिवलिंग पर तांबे, चांदी या सोने के लोटे से जल चढ़ाना चाहिए। स्टील या लोहे के लोटे से जल न चढ़ाएं। जल चढ़ाते समय शिवजी के मंत्रों का जाप करना चाहिए। जल के साथ ही शिवलिंग पर दूध, दही, शहद भी चढ़ाना चाहिए। इस तरह अभिषेक करने के बाद शिवलिंग पर बिल्व पत्र, धतूरा, आंकड़े के फूल, भोग आदि चीजें अर्पित करें।
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