Chandil : चांडिल अनुमंडल में इन दिनों नदी घाटों पर बालू माफिया का राज है। जिला प्रशासन की सख्ती के दावों के बावजूद तिरुलडीह और ईचागढ़ के घाटों से बालू की खुली लूट जारी है। कागजों पर तीन-तीन चेकनाका, मगर हकीकत में सब ‘हाथी दांत,’ दिखाने के और, काम के और! सूरज ढलते ही सैकड़ों हाईवा अवैध बालू लादकर रांची, जमशेदपुर और पश्चिम बंगाल की ओर निकल पड़ते हैं। ईचागढ़ थाना क्षेत्र के गौरांगकोचा, टीकर और झाड़ुआ मोड़ पर बैरियर तो लगाये गये, पर अब वहां तैनात पुलिस और दंडाधिकारी नदारद रहते हैं। हालात ऐसे कि दिनदहाड़े भी बालू लदे वाहन बेखौफ गुजर रहे हैं, जैसे रास्ता ही उनका हो। कोई रोकने-टोकने और धरने वाले नहीं। सूत्र बताते हैं कि पूरा खेल एक संगठित सिंडिकेट चला रहा है, जो ‘सिस्टम’ को भी मैनेज करने में माहिर है। हर हाईवा में क्षमता से 200-300 CFT ज्यादा बालू बिना चालान के ढोया जा रहा है। तिरुलडीह और ईचागढ़ के घाटों से निकलने वाला बालू पश्चिम बंगाल के पुरुलिया, बलरामपुर, बाराबाजार और पटमदा तक पहुंच रहा है। वहां ऊंचे दामों पर बिकने वाली यह रेत, यहां की नदियों का सीना छलनी कर रही है। बालू माफियाओं की करतूत से एक तरफ सरकारी राजस्व को भारी चूना लग रहा है, दूसरी तरफ गरीब ग्रामीण परेशान हैं। पीएम आवास और अबुआ आवास योजना के लाभार्थियों को घर बनाने के लिए बालू तक नहीं मिल रहा। मजबूरी में ग्रामीणों को ट्रैक्टर के लिए 4 से 4.5 हजार और एक हाईवा के लिये 25 से 30 हजार रुपये तक चुकाने पड़ रहे हैं।
सुवर्णरेखा की रेत पर ‘सिंडिकेट’ का साया, सिस्टम बना मौनी बाबा…
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