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68 साल की उम्र में मिली थी उम्रकैद, 105 उम्र में बची सजा भी माफ…

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Kohramlive : उम्र ने जब 105 का आंकड़ा पार कर लिया, तब आखिरकार अदालत ने वह दरवाजा खोल दिया, जिसका इंतजार रसिक चंद्र मंडल ने अपनी जिंदगी के सबसे लंबे वर्षों में किया था। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उनके खिलाफ दशकों पुराने हत्या के मामले को बंद करते हुये बची हुई सजा माफ कर दी और 2024 में दिये गये जमानत आदेश को अंतिम कर दिया। इसके साथ ही 1988 में शुरू हुई मंडल की लंबी कानूनी लड़ाई का भी अंत हो गया। इस मुकदमे ने उनकी जिंदगी के कई दशक जेल की चारदीवारी के भीतर गुजार दिये।

68 साल की उम्र में मिली थी उम्रकैद

पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में वर्ष 1920 में जन्मे रसिक चंद्र मंडल को वर्ष 1994 में, जब उनकी उम्र 68 साल थी, हत्या के एक मामले में दोषी ठहराया गया था। अदालत ने उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई। इसके बाद मंडल लंबे समय तक जेल में रहे। 29 नवंबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें अंतरिम जमानत दी थी। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अब शुक्रवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने मामले पर अंतिम राहत दे दी। पीठ ने मंडल की उम्र को देखते हुये मामले को बंद करने का फैसला किया। अदालत ने कहा कि मामले में यदि कोई सजा बाकी है तो उसे भी माफ किया जाता है। वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने 2024 में दिये गये अंतरिम जमानत आदेश को पूरी तरह और अंतिम कर दिया। इसका सीधा मतलब है कि अब मंडल को इस मामले में दोबारा जेल नहीं लौटना पड़ेगा।

2024 में भी उम्र बनी थी राहत की वजह

नवंबर 2024 में जब मंडल की याचिका सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी, तब पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से अदालत को बताया गया था कि उन्हें उम्र से जुड़ी स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां हैं, हालांकि उनकी स्थिति स्थिर है। राज्य के वकील ने अदालत को उनकी उम्र की जानकारी देते हुये बताया था कि वह जल्द ही अपना 104वां जन्मदिन मनाने वाले हैं। मंडल की बढ़ती उम्र को देखते हुये सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें अंतरिम जमानत देने का फैसला किया था। अदालत ने उस समय निर्देश दिया था कि उन्हें ट्रायल कोर्ट की तय शर्तों के आधार पर अंतरिम जमानत/पैरोल पर रिहा किया जाये। मंडल की कानूनी लड़ाई यहीं खत्म नहीं हुई थी। वर्ष 2018 में कलकत्ता हाईकोर्ट ने हत्या के मामले में उनकी सजा को चुनौती देने वाली अपील खारिज कर दी थी।इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन तत्काल उन्हें राहत नहीं मिली। आखिरकार उम्र और परिस्थितियों को देखते हुये 2024 में उन्हें अंतरिम जमानत मिली और अब 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने मामले को पूरी तरह बंद कर दिया। जिस उम्र में ज्यादातर लोग अपने परिवार के बीच बैठकर बीते दिनों की यादें संजोते हैं, उस उम्र में रसिक चंद्र मंडल ने अपनी जिंदगी का बड़ा हिस्सा जेल में गुजारा। अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उनके लिए कानूनी लड़ाई का वह लंबा अध्याय बंद हो गया है, जो 1988 से चला आ रहा था।

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