रांची : डरने से काम चलेगा बाबू, घर में छोटे-छोटे बच्चे हैं, बीवी हैं और बूढ़ी मां भी है। सबका पेट भरना है। मां की दवा भी लानी है। रोज कमाते हैं, रोज खाते हैं। पापी पेट का सवाल है। भला हो मुख्यमंत्री का जिन्होंने गरीबों की जीविका का ख्याल रहा। वरना निवाला भी जुटाना मुश्किल था। इक्का-दुक्का ही सवारी मिल रही है। पर काम चल जाता है। ये कहना है e-रिक्शा और ऑटो चलाने वाले रिंकू, प्रभात रंजन, असीतमल और जयप्रकाश का। ये सभी मिले लालपुर चौक पर। थोड़ा आगे बढ़े तो मिली सरबतिया चाची, बेच रही सब्जी पूछने पर बोली दाम तो जरूर बढ़ गया है। कल बेचे परवल 40 रुपये किलो आज बेच रहे 80 रुपये किलो। ग्राहक नहीं के बराबर आते हैं।
राजधानी का हृदयस्थल अल्बर्ट एक्का चौक के आसपास सिर्फ सुनाइए पड़ रही थी पुलिस गाड़ियों की शायरण की आवाज देखिए आगे आगे चल रहे हैं रांची के डीसी छवि रंजन और पुलिस कप्तान सुरेन्द्र कुमार झा। पीछे-पीछे आ रहे 300 जवान और अगल-बगल 30 पीसीआर और इतने ही टाइगर mobile। ये हैं पुरुलिया रोड, जहां छोटे बड़े स्कूल कॉलेज हर किसी के गेट पे लगा है ताला। कहीं कोई अड्डेबाजी नहीं। सब कुछ था सुना सुना। अब हम पहुंचे हैं कारोबारियों का सबसे बड़ा बाजार माने जाने वाला अपर बाजार।
देखिए, गजब का सनट्टा है यहां। ये वही बाजार है जब खुली रहती है तो रेंगते हैं लोग। रोज होता है करोड़ रुपये का लेन देन। बगल वाली गली जो देख रहे हैं ये है रंगरेज गली। जब खुली रहती है तो चिंटी भी चले तो दब कर मर जाना तय। मतलब आप समझ गए होंगे यहां गजब की रहती है भीड़। पर आज है बिल्कुल सुना-सुना, सचमूच कोरोना ने जब अपना खौफनाक चेहरा दिखाया तो ऐसा कोई नहीं जो डरा नहीं। आलम यह है कि जितने भी मंदिर-मस्जिद, चर्च, गुरुद्वारे हैं, खुले तो जरूर हैं, लेकिन भीड़ खींच रही सबसे ज्यादा सदर अस्पताल में, देखिए, तस्वीर में…











