Koderma : कोडरमा की पहाड़ियों और खेतों के बीच बसा डोमचांच उस रविवार कुछ ज्यादा ही खामोश था। दो घरों में एक साथ बुझी रौशनी ने पूरे इलाके को सन्न कर दिया। प्रेम के नाज़ुक धागे में बंधे दो नाबालिग—एक तेतरियाडीह का छात्र, दूसरी बेहराडीह की छात्रा, अपने-अपने घरों में हमेशा के लिए खामोश हो गये। कहानी कोई फिल्मी नहीं थी, बस एक साल पुराना मासूम रिश्ता था, जिसमें सपने ज्यादा थे और समझ कम। दोनों पढ़ाई के साथ भविष्य के सपने बुन रहे थे, लेकिन जब घरवालों को इस रिश्ते की भनक लगी, तो सख्ती आ गई। समझाने के बजाय डांट पड़ी, और उसी डांट के बीच दोनों के भीतर कुछ टूट गया। ग्रामीणों की मानें तो उस दिन दोनों बेहद चुप थे। जैसे शब्द साथ छोड़ गये हों। शाम ढलने से पहले दो अलग-अलग घरों से उठी चीखों ने पूरे गांव को हिला दिया। पुलिस पहुंची, औपचारिकताएं हुईं, पोस्टमार्टम के लिए शव भेजे गये।
दो घरों से एक साथ उठी चीखें, इलाका सन्न…
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