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रिनपास का सौ साल का सफर, जख्मों पर मरहम लगाने की तपस्या

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Ranchi : रांची की पहाड़ियों के बीच, जहां कांके की हवा सदा मन को सुकून देती है, वहीं रिनपास (RINPAS) खड़ा है, जिसने इंसान की पीड़ा को समझने और उसे राहत देने का सौ साल लंबा सफर तय किया है। अब जब यह कारवां 100 बरस का हो चुका है, तो इसकी सदी-भर की यादें एक जश्न में बदल रही हैं। कल यानी 4 सितंबर की सुबह 11 बजे, रांची के J.E Dhunjibhoy Academic and Research Center की चौखट पर वह ऐतिहासिक घड़ी लिखी जायेगी। CM हेमंत सोरेन इस समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शामिल होंगे। रिनपास के इस सदी उत्सव को यादगार बनाने की पूरी तैयारी की गई है।

तीन दिन चलेगा जश्न

4 से 6 सितंबर तक रिनपास की गलियों में उत्सव का रंग बिखरेगा। यह सिर्फ एक संस्थान का नहीं, बल्कि झारखंड की सामूहिक स्मृतियों और सेवा की परंपरा का उत्सव है। इस अवसर पर प्रेस और मीडिया के साथियों को भी आमंत्रण है, ताकि वे इस सदी भर की कहानी को जनता तक पहुंचा सकें। एक ऐसी कहानी, जिसमें सेवा है, समर्पण है और समाज के जख्मों पर मरहम लगाने की तपस्या है।

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