spot_img
spot_img

कोरोना के बीच राहत की खबर, DRDO की इस दवा से जल्द रिकवर हो रहें मरीज

Date:

spot_img
spot_img
📖भाषा चुनें और खबर सुनें:
🎙️कोहराम LIVE रेडियो

kohramlive desk : कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच शनिवार को एक राहत भरी खबर आई। ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने कोरोना के इलाज के लिए एक दवा के इमरजेंसी यूज को मंजूरी दे दी है। ये दवा डीआरडीओ के इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लियर मेडिसिन एंड अलायड साइंसेस (INMAS) और हैदराबाद सेंटर फॉर सेल्युलर एंड मॉलिक्युलर बायोलॉजी (CCMB) के साथ मिलकर तैयार की है। इस दवा को अभी 2-deoxy-D-glucose (2-DG) नाम दिया गया है और इसकी मैनुफैक्चरिंग की जिम्मेदार हैदराबाद स्थित डॉ. रेड्डी लैबोरेट्रीज को दी गई है।

क्लनिकल जांच में सफलता

दवा के क्लीनिकल ट्रायल्स सफल साबित हुए हैं। दावा है कि जिन मरीजों पर इसका ट्रायल किया गया, उनमें तेजी से रिकवरी देखी गई। साथ ही मरीजों की ऑक्सीजन पर निर्भरता भी कम हो गई। ये भी दावा है कि दवा के इस्तेमाल से मरीजों की कोरोना रिपोर्ट बाकी मरीजों की तुलना में जल्दी निगेटिव हो रही है। यानी, वो जल्दी ठीक भी हो रहे हैं।

Read More : बिहार में शादी पर रोक नहीं, DJ पर बैन… जानिये बिहार का नया Guideline

अप्रैल 2020 में शुरू हुआ प्रयोग

डीआरडीओ के वैज्ञानिकों ने अप्रैल 2020 में लैब में इस दवा पर एक्सपेरिमेंट किए थे। एक्सपेरिमेंट में पता चला था कि ये दवा कोरोना वायरस को रोकने में मदद करती है। इसके आधार पर DCGI ने मई 2020 में फेज-II ट्रायल्स करने की मंजूरी दी थी।

  • फेज-II में देशभर के अस्पतालों में इस दवा का ट्रायल किया गया।
  •  फेज-IIa के ट्रायल 6 और फेज-IIb के ट्रायल 11 अस्पतालों में किए गए।
  • 110 मरीजों को शामिल किया गया।
  • ये ट्रायल मई से अक्टूबर के बीच किया गया था।



 
यह आया नतीजा

जिन मरीजों पर इस दवा का ट्रायल किया गया, वो बाकी मरीजों की तुलना में कोरोना से जल्दी ठीक हुए। ट्रायल में शामिल मरीज दूसरे मरीजों की तुलना में 2.5 दिन पहले ठीक हो गए।

फेज-III का प्रोसेस

दिसंबर 2020 से मार्च 2021 के बीच देशभर के 27 अस्पतालों में फेज-III के ट्रायल्स हुए। इस बार 220 मरीजों को इसमें शामिल किया गया। ये ट्रायल दिल्ली, यूपी, बंगाल, गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र, आंध्र, तेलंगाना, कर्नाटक और तमिलनाडु में किए गए।

देखें बेहतर नतीजा

जिन लोगों को 2-DG दवा दी गई, उनमें से 42% मरीजों की ऑक्सीजन की निर्भरता तीसरे दिन खत्म हो गई। लेकिन, जिन्हें दवा नहीं दी गई, ऐसे 31% मरीजों की ही ऑक्सीजन पर निर्भरता खत्म हुई।  दवा से ऑक्सीजन की जरूरत भी कम हुई। एक अच्छी बात ये भी रही कि यही ट्रेंड 65 साल से ऊपर के बुजुर्गों में भी देखा गया।



कैसे काम करती है यह दवा

यह दवा पाउडर के रूप में आती है, जिसे पानी में घोलकर लिया जाता है। ये दवा संक्रमित कोशिकाओं में जमा हो जाती है और वायरल सिंथेसिस और एनर्जी प्रोडक्शन कर वायरस को बढ़ने से रोकती है। इस दवा की खास बात ये है कि ये वायरस से संक्रमित कोशिकाओं की पहचान करती है। ये दवा ऐसे वक्त में बहुत कारगर साबित हो सकती है, जब देशभर में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है और मरीजों को ऑक्सीजन की जरूरत पड़ रही है। दावा किया जा रहा है कि दवा की वजह से मरीजों को ज्यादा दिन तक अस्पताल में रुकने की जरूरत भी नहीं होगी।

Read More : यात्रीगण कृप्या ध्यान दें : 9 से 16 मई तक नहीं चलेंगी ये ट्रेनें

spot_img
spot_img
spot_img
spot_img

Related articles:

UPSC की असिस्टेंट कमांडेंट परीक्षा 19 जुलाई को…

Kohramlive : देश की सीमाओं की रक्षा करने, आतंकवाद...

अब एयरपोर्ट पर लगेंगे फुल बॉडी स्कैनर, शुरू हुआ ट्रायल…

Kohramlive : भारत के एयरपोर्ट्स पर यात्रियों की सुरक्षा...

ट्रंप टैरिफ का खेल खत्म, भारत को मिल सकते हैं 94,649 करोड़ रुपये…

Kohramlive : कभी दुनिया की सबसे ताकतवर अर्थव्यवस्था की...

भारत में लॉन्च हुआ Redmi Turbo 5, 7540mAh बैटरी बनी सबसे बड़ी ताकत

Kohramlive : स्मार्टफोन बाजार में प्रतिस्पर्धा के बीच शाओमी...

स्लोवाकिया के सर्वोच्च सम्मान से नवाजे गये PM मोदी, बनाया रिकॉर्ड…

New Delhi : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को स्लोवाकिया के...