Ranchi : झारखंड में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों का गुस्सा एक बार फिर सड़कों पर उतरने की तैयारी में है। JPSC-JSSC अभ्यर्थी न्याय मंच ने शुक्रवार को रांची में प्रेस कांफ्रेंस कर भर्ती प्रक्रिया को लेकर सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किये। मंच ने आरोप लगाया कि सरकार ने अदालत में अपने ही फैसलों का मजबूती से बचाव नहीं किया। छात्र नेता देवेंद्रनाथ महतो ने साफ कहा कि अब आंदोलन समझौते की राह पर नहीं जायेगा। मंच ने 24 अगस्त से ‘भर्ती व्यवस्था सुधार यात्रा’ शुरू करने का ऐलान किया है, वहीं, 15 सितंबर की हाईकोर्ट सुनवाई को आंदोलन की अगली बड़ी कसौटी बताया है। मंच के अनुसार, 24 अगस्त को यात्रा की शुरुआत दिशोम गुरु शिबू सोरेन के पैतृक गांव नेमरा से होगी। इसके बाद यह यात्रा झारखंड के सभी 24 जिलों तक पहुंचेगी। देवेंद्रनाथ महतो ने कहा कि यात्रा का मकसद सिर्फ सरकार का विरोध करना नहीं, बल्कि ऐसी भर्ती व्यवस्था की मांग करना है, जिसमें भविष्य में परीक्षा की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सवाल न उठें। उनके मुताबिक, झारखंड गठन के 26 साल बाद भी भर्ती व्यवस्था भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोपों से बाहर नहीं निकल सकी है।
5 जुलाई से शुरू हुआ आंदोलन, अब दूसरे चरण में
देवेंद्रनाथ महतो ने बताया कि छात्रों का आंदोलन 5 जुलाई से शुरू हुआ था। 25 जुलाई से इसे अनिश्चितकालीन सत्याग्रह में बदल दिया गया। मंच का दावा है कि आंदोलन के दबाव में सरकार को 22 परीक्षाएं रद्द, छह स्थगित और 17 मामलों में जांच का निर्णय लेना पड़ा। हालांकि इसके कुछ ही समय बाद मामला हाईकोर्ट पहुंच गया और JPSC की 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा समेत FSO, CDPO और JSSC-CGL से जुड़े फैसलों पर अदालत से रोक लग गई। छात्र नेताओं का सबसे बड़ा आरोप सरकार की न्यायालय में पैरवी को लेकर है। देवेंद्रनाथ महतो ने सवाल उठाया कि सरकार ने अदालत में CID जांच रिपोर्ट और अपने फैसले के आधार को मजबूती से क्यों नहीं रखा। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि सुनवाई के पहले दिन महाधिवक्ता अदालत में क्यों मौजूद नहीं थे। मंच का कहना है कि उनकी लड़ाई किसी निर्दोष की नौकरी छीनने की नहीं है। छात्रों की मांग है कि दोषी की पहचान कर कार्रवाई हो और पूरी भर्ती व्यवस्था को पारदर्शी बनाया जाये।
“15 सितंबर को बात नहीं बनी तो CM आवास घेरेंगे”
मंच ने 15 सितंबर की हाईकोर्ट सुनवाई को लेकर सरकार को सीधी चेतावनी दी है। देवेंद्रनाथ महतो ने कहा कि अगर उस दिन सरकार ने छात्रों के हित में मजबूत और प्रभावी पक्ष नहीं रखा, तो छात्र बड़ी संख्या में मुख्यमंत्री आवास का घेराव करेंगे। जरूरत पड़ने पर आंदोलन को और व्यापक करते हुये अनिश्चितकालीन चक्का जाम जैसे कदम उठाने की भी चेतावनी दी गई है। प्रेस कांफ्रेंस में मंच ने PGT भर्ती समेत कई अन्य परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की ओर भी सरकार का ध्यान खींचा। मंच के प्रतिनिधि राजेश प्रसाद ने कहा कि आंदोलन के दौरान सरकार ने छात्रों से भरोसा रखने की अपील की थी और छात्रों ने उस भरोसे के आधार पर अपना आंदोलन भी समाप्त किया। लेकिन बाद में जब परीक्षाओं को रद्द करने के फैसले अदालत में चुनौती दिये गये तो मंच के अनुसार सरकार की ओर से प्रभावी पैरवी नहीं हुई। राजेश प्रसाद का आरोप है कि 11वीं से 13वीं JPSC परीक्षा मामले में सुनवाई के पहले दिन सरकार की ओर से उपस्थित अधिवक्ता ने केवल जवाब दाखिल करने के लिये समय मांगा, जबकि सरकार के पास अपने फैसले और CID जांच के आधार को विस्तार से रखने का मौका था।








