Khunti : घने बीहड़ और पत्थरों का सीना चीर कर बसा खूंटी के कोदेलेबे गांव में आज अजीब सा सन्नाटा था। अधिकतर घरों के दरवाजे पर बाहर से ताले लटके हुए थे। उम्रदराज महिलाओं और बच्चों को छोड़ कोई दूसरा नहीं मिला। मेल मेम्बर खोजने पर भी ना मिला, ना दिखा। कोदेलेबे गांव के ग्राम प्रधान बयार सिंह मुंडा उर्फ सुखराम मुंडा के घर का आंगन खून से लाल था। बरामदे से कुछ ही दूरी पर ग्राम प्रधान की डेड बॉडी पड़ी थी। बरामदे से ही सटी एक झोपड़ी में ग्राम प्रधान के बेटे सिंगा मुंडा और बहु मानी हरिबीना लहूलुहान होकर बेजान पड़े थे। उनके बदन में भी कोई हलचल नहीं थी। जुटे नाते-रिश्तेदारों ने उन्हें झकझोरा, टटोला… खूब हिलाया-डुलाया और पुकारा, तब भी उनमें कोई हरकत नहीं हुई। एक रिश्तेदार के मुख से बस इतना निकला कि तीनों सदा के लिए सो गये।
मारे गये ग्राम प्रधान के घर के आसपास से जुटे लोग बिल्कुल खामोश थे। पूछने पर वह कुछ नहीं बोले। उनकी खामोशी यह बयां कर रही थी कि हत्यारे कोई मामूली शख्स नहीं। कातिलों का डर उनके चेहरों पर साफ झलक रहा था। उनकी खामोशी सिर्फ यह बयां कर रही थी कि उन्हें अभी जीना है। उन्हें बाहर खासकर पुलिस को कुछ भी बताने के लिए सख्त मना किया गया है। डर और दहशत का मंजर यह था कि करीब 39 घंटे तक खूंटी पुलिस भी बेखबर रही। सनसनीखेज इस ट्रिपल मर्डर के बारे में गुरुवार की शाम पुलिस को जानकारी मिली।
मारे गए ग्राम प्रधान की एक रिश्तेदार बनापीढ़ी देवी ने सबसे पहले अड़की के समाजसेवी मंगल मुंडा को बताया। इसके बाद मंगल ने पुलिस को। पुलिस रात हो जाने के कारण हिली डुली नहीं। घोर नक्सली इलाका होने के कारण रात में मूवमेन्ट में खतरा था। शुक्रवार को खूंटी के SDPO अमित कुमार पूरे लाव-लश्कर के साथ गांव पहुंचे। वहां का दृश्य काफी डरावना और भयानक था। कुछ संदेही चेहरे पेड़ के पीछे छिपकर गांव में आने वाले अनजान चेहरों को निहार भी रहे थे। मानो उन्हें यह टास्क मिला हो कि सबकुछ देख बताने का।
शुरुआती जांच में दो तरह की बातें सामने आयी। खूंटी के कोदेलेबे गांव में कुल 22 लोगों का परिवार हैं। इसमें से 15 परिवार ग्राम प्रधान के साथ थे। वहीं 7 उन्हें नापसंद करते थे। इन्हें गांव के लोग अपनी भाषा में एसी कुटुम्ब के नाम से पुकारा करते हैं। कहते हैं कि इनमें से कुछ लोगों ने ग्राम प्रधान से अदावत ले ली थी। बाद में बगावत कर ली। वहीं दूसरा कारण उभरकर सामने यह आया है कि इस गांव में रहने वाले कुछ दबंग किस्म के लोग ग्राम प्रधान को देखना नहीं चाहते थे। उन्हें सबसे बड़ा कांटा समझते थे। अदावत इतनी बढ़ गयी थी कि न्योता पिहानी भी इनके बीच नहीं होता था। यही वजह है कि ग्राम प्रधान के साथ-साथ उनके बेटे और बहु को भी मार डाला गया। बेटे को इसलिए मारा कि ग्राम प्रधान के मरने के बाद उसकी जगह बेटे को ना मिल जाये। वहीं बहू शायद कुछ लोगों को पहचान ली थी। इसलिए उसे भी खत्म कर दिया गया। ऐसा खूंटी पुलिस के एक आला अधिकारी का भी मानना है।
ग्राम प्रधान की बेवा गोमा देवी के अनुसार वह अपनी दो बेटियों पालो और रूपन के साथ अलग घर में सोई हुई थी। अचानक पोते एतवा मुंडा के रोने की आवाज सुन जागी। बाहर आयी तो पति और बेटे-बहू को खून से लथपथ देखी। तीनों को बड़ी बेदर्दी से धारदार हथियार से काट दिया गया था। 6 साल के पोते को भी पीटा गया। सबसे ज्यादा परेशानी पुलिस को डेड बॉडी ढोकर ले जाने में हुई। करीब 4 किलोमीटर तक डेड बॉडी को बोह कर ले गई। गांव में गाड़ियों के आने-जाने का रास्ता नहीं है। पुलिस भी फिलहाल खामोश है। उनका कहना है कि मामले की जांच-पड़ताल की जा रही है।
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