Kohramlive: विजयादशमी कहें या दशहरा, ये अश्विन माह के दसवें दिन मनाया जाता है। नौ दिवसीय मां दुर्गा के नवरात्रों का दशहरे के दिन ही समापन होता है. रावण दहन के साथ ही यह त्योहार समाप्त हो जाता है। क्या आपको जानते हैं ,देश में ऐसी भी कुछ जगह हैं, जहां दशहरे के दिन रावण दहन नहीं किया जाता बल्कि उसकी पूजा की जाती है। आज हम आपको ऐसी ही कुछ जगहों के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां दशहरे के दिन रावण की पूजा की जाती है।
1. उत्तर प्रदेश के बिसरख में रावण का दहन नहीं किया जाता बल्कि वहां रावण और रावण के पिता ऋषि विश्वा की पूजा होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रावण का जन्म उत्तर प्रदेश के बिसरख में हुआ था। उस जगह का नाम ऋषि विश्वा के नाम पर ही इसी विश्वा के नाम पर बिसरख पड़ा।
2. जोधपुर के मौदगिल में रावण को ब्राह्मण समाज का वंशज माना जाता है। इसी वजह से वहां के लोग रावण का दहन करने की बजाय उसकी पूजा कर उसकी आत्मा की शांति के लिए पिंडदान भी करते हैं।
3. हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में रावण का दहन नहीं किया जाता है। वहां के लोगों का मानना हैं कि रावण ने भगवान शंकर को बैजनाथ कांगड़ा में ही अपनी कठिन तपस्या से प्रसन्न किया था और तब से लेकर अब तक वहां के लोग रावण को शिव का परम भक्त मानकर ,उसकी पूजा करते हैं।
4. उज्जैन के चिकली गांव में भी रावण का पुलता जलाने की जगह उसकी पूजा की जाती है। लोगों का मानना है कि यदि रावण की पूजा नहीं होगी ,तो पूरे गांव का सर्वनाश हो जाएगा इसलिए हर साल दशहरे के दिन इस गांव में रावण की बड़ी सी मूर्ति स्थापित कर उसकी पूजा की जाती है।
5.महाराष्ट्र के एक गांव गढ़चिरौली में भी लोग रावणका दहन करने की जगह उसकी पूजा करते है। कहा जाता है कि रावण देवताओं का पुत्र था और उसने अपने जीवन में कोई भी गलत काम नहीं किया।
इसे भी पढ़ें : सरेराह टपका डाला रंजीत सरदार को, टसल शुरू… देखें वीडियो
इसे भी पढ़ें : वाह! ‘संस्कृत’ में क्रिकेट कमेंट्री, VIDEO देख लोग बोले…
इसे भी पढ़ें : उत्तरकाशी में बड़ी आपदा, बर्फ के तूफान में फंसे 29 पर्वतारोही, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी






