Ranchi : चांद की हल्की-हल्की रोशनी जब आसमान में फैली, तो हर दिल में एक अजीब-सी सुकून भरी खुशी दौड़ पड़ी। भारत की फिजाओं में 1 मार्च की शाम जैसे ही आसमान में रमजान के चांद की झलक मिली, पूरा माहौल नूरानी हो उठा। दिल्ली की जामा मस्जिद से लेकर मुंबई की मीनारों तक, लखनऊ की तंग गलियों से लेकर झारखंड की चहल-पहल भरी सड़कों तक, हर जगह इबादत का एक अलग ही रंग देखने को मिला। मस्जिदों से अजान की आवाज आई, रोजेदारों ने खुद को अल्लाह की इबादत में झुका दिया।
रमजान सिर्फ एक महीना नहीं, बल्कि खुद को गुनाहों से पाक करने, नेकियों से दामन भरने और अल्लाह की रहमतों में भीग जाने का मौका है। सहरी के वक़्त अम्मी की मीठी आवाज जब बच्चों को जगाती है, तो घरों में हलचल बढ़ जाती है। कोई दूध गर्म कर रहा होता है, कोई खजूर सजाने में लगा होता है और फिर जब दिनभर की भूख-प्यास के बाद इफ्तार का वक्त आता है, तो वह पहला निवाला सीधे रूह तक पहुंचता है। यह महीना सब्र का इम्तिहान भी है और नेकी का इनाम भी। कहते हैं, इस दौरान की गई इबादत कई गुना ज्यादा फल देती है। गरीबों की मदद करना, भूखों को खिलाना, और नमाज में झुककर तौबा करना—यही रमजान की असली रूह है।












