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आसमान से बरसती कहर, धनबाद में मची चीख पुकार, देखें…

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Dhanbad : सावन के इस महीने में झमाझम बारिश में जहां-तहां आसमान से कहर भी बरसने लगी है। गुजरे एक रोज में ठनका गिरने से कई काल के गाल में समा गये, तो कई झुलस अस्पताल पहुंच गये। कई की मांग सूनी हो गई, तो कई की गोद। चीख-चीत्कार सोमवार को धनबाद में हुआ। सावन के तीसरे सोमवार पर धनबाद के आमझर पंचायत के परघा में प्राचीन राजवाड़ी मंदिर में आज भीड़ जुटी थी। जमकर बारिश हो रही थी, अचानक मंदिर परिसर में ठनका गिर गया। इसकी चपेट में आकर कई महिलायें और बच्चे झुलस गये। चारों तरफ कोहराम मच गया। सभी को बलियापुर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र ले जाया गया। वहीं कुछ को बेहतर इलाज के लिये SNMMCH में भर्ती कराया गया। कुछ की हालत बहुत खराब है। वहीं आज दुमका के जरमुंडी थाना क्षेत्र के तिलवरिया गांव में भी ठनका गिरा। इसमें एक विवाहिता की मौत हो गई। विवाहिता पूजा कर अपने घर लौट रही थी, तभी यह हादसा हो गया। मांडर, रामगढ़, चांडिल और पलामू में भी ठनका गिरने से लगभग 7 लोग काल के गाल में समा गये।

झारखंड में ठनका गिरना अब चौंकाती नहीं। हर साल इसमें इजाफा ही हो रहा है। आंकड़े इस बात के गवाह हैं। उपलब्ध दस्तावेज दर्शाते हैं कि गुजरे 11 साल में झारखंड में ठनका के गिरने से 2457 लोगों की जान चली गई। वर्ष 2012 में 148, वर्ष 2013 में 159, 2014 में 144, 2015 में 210, वर्ष 2016 में 265, वर्ष 2017 में 256, वर्ष 2018 में 261, वर्ष 2019 में 283, वर्ष 2020 में 322, वर्ष 2021 में 343 लोगों की जान गई। वहीं वर्ष 2022 में अबतक 66 लोग आहत हुये। ठनका से जान माल को नुकसान होने से बचाने का एक ही जरिया है, वह है तड़ित चालक। अगर इस मसले पर गौर किया गया तो कई जान जाने से बचाई जा सकती है।

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