Kohramlive : पहाड़ों पर इस बार मानसून मुसीबतों का सैलाब लेकर आया। हिमाचल प्रदेश में मानसून और प्राकृतिक आपदाओं ने अब तक बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। विधानसभा में विधायक विपिन सिंह परमार के सवाल के जवाब में राजस्व मंत्री ने जो आंकड़े रखे, वे प्रदेश में आई आपदा की भयावह तस्वीर बयां कर रहे हैं। अब तक 111 लोगों की मौत, नौ लोगों के घायल होने और पांच परिवारों के विस्थापित होने की जानकारी सामने आई है। प्राकृतिक आपदा से सबसे ज्यादा चोट सिरमौर जिले को लगी है। यहां अकेले 87 लोगों की जान चली गई। वहीं, लाहौल-स्पीति में 16, सोलन में 4, मंडी में 2, कांगड़ा में 1 एवं कुल्लू में 1 लोगों की जान चली गई। इन आंकड़ों के बीच सबसे दर्दनाक तस्वीर उन परिवारों की है, जिन्होंने अपनों को खो दिया।
743 मकान हुये क्षतिग्रस्त
बारिश और आपदा की मार लोगों के घरों तक भी पहुंची। प्रदेश में कुल 743 मकान क्षतिग्रस्त हुये हैं। सोलन में सबसे ज्यादा 239 मकानों को नुकसान पहुंचा, जबकि कांगड़ा में 155 और मंडी में 136 मकान प्रभावित हुये। कांगड़ा में पांच परिवारों के विस्थापित होने की भी जानकारी दी गई है। वहीं, प्रदेश में 3674 सड़कें और 11 पुल क्षतिग्रस्त हुये हैं। कांगड़ा में 736 सड़कें प्रभावित हुईं। इसके बाद मंडी में 615 और शिमला में 614 सड़कों को नुकसान पहुंचा। बारिश से रास्ते टूटे तो कई इलाकों में आवाजाही और रोजमर्रा की जिंदगी पर सीधा असर पड़ा।
3090 पेयजल योजनायें भी प्रभावित
आपदा ने सिर्फ सड़क और मकानों को नहीं, बल्कि पानी की व्यवस्था को भी झकझोर दिया। प्रदेश में 3090 पेयजल योजनायें प्रभावित हुई हैं। चंबा में 548, शिमला में 514 और कांगड़ा में 499 पेयजल योजनाओं को नुकसान पहुंचा है। बिजली व्यवस्था भी अछूती नहीं रही। 494.49 किलोमीटर हाईटेंशन लाइन, 755.07 किलोमीटर लो टेंशन लाइन, 1770 बिजली के खंभे और 338 ट्रांसफार्मर क्षतिग्रस्त हुये हैं। आपदा से सरकारी और निजी संपत्तियों को भी भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। लोक निर्माण विभाग की सड़कों को 536.83 करोड़ रुपये, जल शक्ति विभाग की पेयजल परियोजनाओं को 116.14 करोड़ रुपये एवं निजी संपत्तियों को 12.87 करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष नुकसान बताया गया है।
जुलाई में आसमान से बरसी आफत
एक मार्च से एक अगस्त तक प्रदेश में औसत बारिश 109.80 मिलीमीटर दर्ज की गई। जुलाई में कांगड़ा में 546.2 मिलीमीटर, सिरमौर में 487.5 मिलीमीटर और चंबा में 447.5 मिलीमीटर बारिश हुई। इसी दौरान कुल्लू और लाहौल-स्पीति में तीन जगह बादल फटने की घटनायें भी हुईं। राहत की बात यह रही कि इन घटनाओं में किसी की जान नहीं गई। सरकार के अनुसार एक अगस्त तक 1871 प्रभावित परिवारों को राहत राशि दी जा चुकी है। वहीं 1260 परिवारों का मुआवजा अभी लंबित है। सरकार के हवाले से मीडिया में आई खबर के अनुसार, राहत प्रबंधन प्रणाली पोर्टल पर आवेदन नहीं करने या आवेदन अधूरा रहने के कारण कई मामलों में भुगतान अटका हुआ है। जरूरी औपचारिकताएं पूरी होते ही राहत राशि जारी की जायेगी।








