Ranchi : रांची के मोरहाबादी मैदान में रविवार को जुटे आदिवासी समाज के बीच परिसीमन का मुद्दा गरमाया रहा। मंच से कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का संदेश पढ़ा गया तो जवाब में भाजपा के राष्ट्रीय मंत्री एवं राज्यसभा सांसद डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा ने भी तीखा पलटवार किया। एक तरफ राहुल गांधी ने परिसीमन को आदिवासी अधिकार, पहचान और सम्मान से जोड़ते हुये कांग्रेस की प्रतिबद्धता दोहराई, तो दूसरी तरफ प्रदीप वर्मा ने सवाल किया कि जब झारखंड में एसटी सीटें घटाने का कोई आधिकारिक प्रस्ताव ही नहीं आया है, तो इस मुद्दे पर भय क्यों फैलाया जा रहा है?
राहुल गांधी का संदेश, ‘आदिवासी अधिकार सर्वोपरि’
राहुल गांधी कार्यक्रम में स्वयं मौजूद नहीं थे। उनका संदेश मंच से पढ़कर सुनाया गया। संदेश में उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाने के बावजूद वे आदिवासी समाज के अधिकार, पहचान और सम्मान की लड़ाई में मजबूती से साथ खड़े हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के लिये आदिवासी अधिकार सर्वोपरि हैं। राहुल गांधी ने संविधान की पांचवीं अनुसूची, PESA कानून और वन अधिकार कानून का जिक्र करते हुये कहा कि इनका उद्देश्य जल-जंगल-जमीन की रक्षा करने वाले समुदायों की अपने संसाधनों पर मजबूत आवाज सुनिश्चित करना है।राहुल गांधी के संदेश में कहा कि विकास लोगों की भागीदारी, सहमति और सम्मान के साथ होना चाहिये। झारखंड के प्राकृतिक संसाधनों पर यहां के लोगों की सार्थक भागीदारी सुनिश्चित किये जाने की बात भी उन्होंने कही। परिसीमन को उन्होंने महज लोकसभा और विधानसभा की सीटों के पुनर्गठन का मुद्दा नहीं माना, बल्कि इसे आदिवासी हक और अधिकार की लड़ाई से जोड़ा।
प्रदीप वर्मा का पलटवार, ‘किस आधार पर फैलाया जा रहा भ्रम?’
राहुल गांधी के संदेश के बाद भाजपा सांसद डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा ने संविधान के अनुच्छेद 332(3) का हवाला देते हुये सवाल उठाया। उनका कहना है कि संविधान में राज्य विधानसभा में अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित सीटों की संख्या उनकी जनसंख्या के अनुपात से संबंधित प्रावधान है। वर्मा ने सवाल किया कि जब अभी तक झारखंड के लिये नया परिसीमन ड्राफ्ट नहीं आया है और निर्वाचन आयोग ने 28 एसटी सीटें घटाने का कोई प्रस्ताव जारी नहीं किया है, तो भाजपा द्वारा आदिवासी सीटें घटाये जाने का दावा किस आधार पर किया जा रहा है? उन्होंने कहा कि अगला सामान्य परिसीमन 2026 के बाद होने वाली पहली जनगणना के प्रकाशित आंकड़ों के बाद संवैधानिक प्रक्रिया के तहत होगा। भाजपा सांसद ने राहुल गांधी पर राजनीतिक मुद्दा बनाने का आरोप लगाते हुये कहा कि अगर वास्तव में आदिवासी अस्तित्व की चिंता है तो आदिवासी आबादी में कमी के सवाल का भी जवाब तलाशना चाहिये। उन्होंने झारखंड हाईकोर्ट में केंद्र सरकार की ओर से दाखिल हलफनामे का हवाला देते हुये संथाल परगना में अनुसूचित जनजाति आबादी के प्रतिशत में कथित गिरावट का मुद्दा उठाया। वर्मा के मुताबिक, हलफनामे में 1951 में संथाल परगना में एसटी आबादी की हिस्सेदारी 44.67 प्रतिशत और 2011 में 28.11 प्रतिशत बताई गई है। उन्होंने पलायन, जन्मदर और धर्मांतरण सहित विभिन्न मुद्दों पर जांच की आवश्यकता का भी उल्लेख किया। डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा ने कहा कि पांचवीं अनुसूची, PESA और वन अधिकार कानून किसी राजनीतिक दल की जागीर नहीं हैं। उनके मुताबिक ये संविधान और कानून से मिले अधिकार हैं और इनकी रक्षा करना सभी की संवैधानिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कांग्रेस से सवाल किया कि संथाल परगना की बदलती जनसांख्यिकी, आदिवासी जमीन की सुरक्षा, पलायन और कथित अवैध घुसपैठ जैसे मुद्दों पर उसका रुख क्या है।







