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रहमत बरसी सरकार की, कमाल कर गई सुनीता दीदी

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  • महोत्सव में स्टॉल लगाने वाली बहिन सब क्या बोल गई… देखें

Ranchi (Nandani Singh/Arti Gupta) : बचपन से ही कुछ हट कर करने की तमन्ना थी, छोटी सी उमर में शादी हो गई, सारी इच्छाएं दिल में दफन हो गई, मन में कसक रह गई, आगे कुछ सूझ नहीं रहा था, भला हो युवा सीएम हेमंत सोरेन का जिनकी वजह से सोई तकदीर जाग गई। बचपन में जो ख्वाब संजोया था वह पूरा हो गया। यह कहना है सुनीता बागवार का। राजधानी रांची के मोहराबादी मैदान में स्टॉल लगाने का पहली बार मौका मिला। यह मौका सरकार की तरफ से मिला। मन गदगद हो गया। झारखंड जनजातीय महोत्सव 2022 में दूर-दूर के राज्य से आई बहिन और छोटे-बड़े साहब को करीब से देखने और सुनने का नसीब हुआ। खुशनसीबी का गुल तब खिला जब उसके हुनर का दाम मिला। महोत्सव में सोहराई पेंटिंग का स्टॉल लगाने आई सुनीता आज बहुत खुश थी। उसने कहा, बचपन में ही मन ही मन यह ठान लिया था, जब कभी मौका मिलेगा तो कुछ अलग जरूर कर दिखाऊंगी। सीखने की कोई उमर नहीं होती। झारखंड सरकार की तरफ से पहली दफा फ्री में ट्रेनिंग करने का मौका मिला। करियर के रूप में आदिवासियों की मशहूर कला सोहराई पेंटिंग को चुना। कला सीखने के बाद मार्केट में उतरी, बहुत अच्छा रेस्पांस नहीं मिला। हिम्मत नहीं हारी, हौसला बनाये रखी, न्यू जेनरेशन को कनेक्ट करने की खातिर सोहराई पेंटिंग को 3 डी में कन्वर्ट किया। अब सोहराई पेंटिंग की मुंह-मांगी कीमत मिलने लगी। रांची के नगड़ी में रहने वाली सुनीता अपने हुनर का जलवा दिखा गई।

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वहीं महोत्सव में लाह से बनी चुड़ियों की स्टाल सजाने वाली सीमा बोली… यह चुड़ियां अब सबकी पसंद हैं। मार्केट में रेस्पांस भी अच्छा मिलता है। वहीं आदिवासी समाज के पारंपरिक गहने जेवरात के स्टॉल लगाने वाली मिनाक्षी प्रकाश बोली… आज भी लोला, बिछुआ, हसली, मंदली और पायल जैसे गहनों का खूब डिमांड है। शादी ब्याह में इन गहनों का अलग क्रेज है। वहीं पंछी साड़ी की खूबियां भी बता गई।

बांस से बनी अपनी कला को बेचने आई दीपाली बनर्जी ने कहा कि अब हर कोई अपना घर सजा कर रखना चाहता है, बांस से बने साज सज्जा के सामानों का भी गजब का क्रेज है। यह भी खूब बिकती है। उन्हें यह सामान बानने के लिए दुमका से बांस खरीदने जाना पड़ता है। यहां के बांस से नहीं बन पाता है। घरों की दीवारों में टंगे देखें होंगे। आंध्रा के विशाखापटनम से अपनी पूरी टीम के साथ आये सुनील वेलोवली आदिवासी नृत्य प्रस्तुत कर सबका दिल मोह गये। सरकार का शुक्रिया अदा किया। सजने संवरने का स्टाल लगाने वाली बोली… यह पूरी तरह हर्बल है, इसके इस्तेमाल से किसी को कोई नुकसान नहीं होता। चेहरे में गजब सा निखार और चमक आ जाती है। शिल्पकार मनोज महोत्सव में आने वाले हर किसी को अपने हुनर का जलवा बता और सिखा गये।

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