Kohramlive : केरल विधानसभा में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग वाला प्रस्ताव पारित किये जाने की खबर है। प्रस्ताव में मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों, वोटरों के नाम हटाये जाने और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाये गये हैं। इस मुद्दे पर सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली।प्रस्ताव में केंद्र सरकार से मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने और मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया में कथित तकनीकी खामियों को दूर करने की मांग की गई है।
सरकार ने जताई नाराजगी
प्रस्ताव पेश करते हुये मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने कहा कि योग्य नागरिकों को मतदान के अधिकार से वंचित करना संविधान की भावना के खिलाफ है। प्रस्ताव में संविधान के अनुच्छेद 326 का हवाला देते हुये कहा गया कि मतदान का अधिकार लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। प्रस्ताव में फॉर्म-6 और फॉर्म-7 में किये गये बदलावों तथा मतदाता सूची तैयार करने और सत्यापन में इस्तेमाल होने वाले सॉफ्टवेयर की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाये गये। सरकार ने मांग की कि तकनीकी गड़बड़ियों को दूर कर सभी पात्र नागरिकों के मतदान के अधिकार की रक्षा की जाये। सदन में प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाये जाने के मुद्दे पर विवाद हुआ। प्रस्ताव में आरोप लगाया गया कि कथित तकनीकी खामियों का असर पिछड़े समुदायों, अल्पसंख्यकों, प्रवासी मजदूरों और युवा मतदाताओं पर पड़ सकता है। प्रस्ताव में जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और निर्वाचक पंजीकरण नियम, 1960 के उल्लंघन का भी आरोप लगाया गया।
भाजपा ने किया विरोध, संशोधनों पर भी बहस
प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान भाजपा विधायकों बी. गोपकुमार और वी. मुरलीधरन ने संशोधन पेश किये। साजी चेरियन ने भी मतदाता सूची से कथित तौर पर बड़ी संख्या में नाम बाहर किये जाने और सॉफ्टवेयर से जुड़े मुद्दों पर संशोधन का सुझाव दिया। सरकार ने भाजपा सदस्यों और दो माकपा विधायकों के संशोधनों को स्वीकार नहीं किया, जबकि विपक्ष के नेता पिनाराई विजयन की ओर से सुझाए गये एक मौखिक संशोधन को मंजूरी दी गई। इसके बाद भी सदन में बहस जारी रही। वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) ने प्रस्ताव का समर्थन किया, जबकि भाजपा ने इसका विरोध किया। विपक्ष की ओर से 2026 के केरल विधानसभा चुनाव रद्द करने और विधानसभा भंग करने की मांग से जुड़ा संशोधन भी पेश किया गया।
प्रस्ताव पारित, लेकिन पद से हटाने का फैसला अलग प्रक्रिया
केरल विधानसभा में प्रस्ताव पारित होना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण घटनाक्रम है, लेकिन इससे मुख्य चुनाव आयुक्त स्वतः पद से नहीं हटते। मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया निर्धारित है और इसके लिये संसद में विशेष प्रक्रिया का पालन करना पड़ता है। इसलिए अब इस प्रस्ताव के राजनीतिक और संवैधानिक प्रभावों पर चर्चा तेज होने की संभावना है। एक तरफ केरल सरकार ने मतदाता सूची और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाये हैं, तो दूसरी तरफ भाजपा ने प्रस्ताव का विरोध किया है।






