पानीपत : टोक्यो ओलंपिक में भाला फेंक में गोल्ड जीतने वाले नीरज चोपड़ा पर इनामों की बारिश हो रही है। हरियाणा सरकार ने 6 करोड़ रुपये और ग्रेड वन नौकरी देने का ऐलान किया है। वहीं कैप्टन अमरिंदर सिंह ने 2 करोड़, मणिपुर सरकार 1 करोड़, चेन्नई सुपर किंग्स 1 करोड़, बीसीसीआई 1 करोड़, एडटेक कंपनी बायजूज 1 करोड़ रुपये, इंडिगो फ्री टिकट और आनंद महिंद्रा XUV700 देंगे।
नीरज ट्रैक एंड फील्ड इवेंट में स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले भारतीय एथलीट बने। नीरज के कारनामे से देश का सीना गर्व से चौड़ा हो गया। पूरा देश जश्न मना रहा है। नीरज ने जैवलिन थ्रो यानी भाला फेंक प्रतियोगिता में दूसरे प्रयास में 87.58 मीटर का बेस्ट थ्रो करके स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया। नीरज ओलंपिक के व्यक्तिगत स्पर्धा में स्वर्ण जीतने वाले दूसरे भारतीय खिलाड़ी बन गये। 13 साल पहले अभिनव बिंद्रा ने बीजिंग ओलंपिक (2008) के 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में देश के लिए सोना जीता था।
87.58 मीटर का थ्रो करके भी नीरज संतुष्ट नहीं थे। वह ओलंपिक रिकॉर्ड की कोशिश कर रहे थे। यहां याद दिला दें कि ओलंपिक में सबसे दूर भाला फेंकने का रिकॉर्ड 90.57 मीटर है। नॉर्वे के Andreas Thorkildsen ने 2008 के बीजिंग ओलंपिक में ये कारनामा किया था।
Read more:हरियाणा के छोरे ने किया कमाल, गोल्ड जीतने के बाद कही ये बात
नीरज चोपड़ा ने कहा कि अपने पहले दो थ्रो अच्छा फेंकने के बाद वह ओलंपिक रिकॉर्ड की कोशिश कर रहे थे। चोपड़ा ने यह भी खुलासा किया कि वह अपने अंतिम थ्रो से पहले कुछ नहीं सोच रहे थे, क्योंकि उन्हें महसूस हो गया था कि वह यहां खेलों में अभूतपूर्व शीर्ष स्थान हासिल कर चुके थे।
हरियाणा के पानीपत के मतलौडा ब्लॉक के गांव खांडरा में किसान सतीश चोपड़ा के घर 24 दिसंबर 1997 को किलकारी गूंजी। घर में एक बेटे का जन्म हुआ। नाम रखा नीरज। घर का इकलौता और बड़ा बेटा होने के कारण खूब लाड़ प्यार मिला। नीरज मोटा तगड़ा हो गया। 80 किलो का नीरज गांव में जब कुर्ता पाजामा पहन कर निकलता तो लोग उसे सरपंच कहकर बुलाते। वजन कम करने के लिए जिम ज्वाइन किया। जिम के पास ही स्टेडियम था। नीरज कभी-कभी टहलते-टहलते वहां चले जाते। एक बार स्टेडियम में कुछ बच्चे जेवलिन कर रहे थे। नीरज वहां जाकर खड़े हो गए, तभी कोच ने पुकारा आओ यहां देखने में तो तगड़ा लग रहे हो।
जरा भाला फेंकों तो देखें कितना दूर फेंक पाते हो। नीरज ने भाला थामा और फेंक, देख सब हैरान। कोच प्रभावित हुये और उन्हें रेगुलर ट्रेनिंग में आने के लिए कहा। कुछ दिनों तक नीरज ने पानीपत स्टेडियम में ट्रेनिंग की, फिर पंचकूला में चले गए और वहां ट्रेनिंग करने लगे। 2014 में 7 हजार रुपये में पहला भाला खरीदा। फिर नेशनल शिविर में एक लाख रुपये का भाला खरीदा। 2018 एशियन गेम में नीरज ने वर्ल्ड रिकॉर्ड के साथ सोना जीता था। इसका नीरज को इनाम मिला। सेना ने नीरज को जूनियर कमीशंड ऑफिसर की पोस्ट देकर उन्हें नायब सूबेदार के पद पर नियुक्त किया।
नीरज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 6 बड़े टूर्नामेंट में मेडल जीत चुके हैं। वे 2018 में जकार्ता एशियन गेम्स, गोल्ड कोस्ट कॉमनवेल्थ गेम्स, 2017 में एशियन चैंपियनशिप, 2016 में साउथ एशियन गेम्स, 2016 में जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीत चुके हैं। जबकि 2016 में जूनियर एशियन चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीता था।
Read more:देश को Gold Medal दिलाने के बाद क्या बोले Neeraj Chopra… सुनिये






