Kohramlive : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दुर्गा पूजा के अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुये कहा कि मां दुर्गा के प्रति सच्ची भक्ति तभी पूरी होती है, जब महिलाओं को व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन के हर क्षेत्र में सम्मान मिले। उन्होंने मां दुर्गा की महिषासुर पर विजय को बुरी शक्तियों पर दैवीय शक्तियों की जीत का प्रेरक उदाहरण बताया। साथ ही देश और विदेश में रहने वाले भारतीयों के जीवन में सुख-समृद्धि और देश की निरंतर प्रगति की कामना की।
दुर्गा पूजा और नारी शक्ति का क्या है संबंध?
मां दुर्गा को शक्ति, साहस और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष का प्रतीक माना जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, महिषासुर के अत्याचारों से मुक्ति दिलाने के लिये देवी दुर्गा ने युद्ध किया और अंततः उसका वध किया। यही कथा संदेश देती है कि शक्ति का उपयोग अन्याय और बुराई के विरुद्ध किया जाना चाहिये। राष्ट्रपति मुर्मू ने इसी परंपरा को महिलाओं के सम्मान से जोड़ते हुये कहा कि नारी शक्ति का आदर भारतीय संस्कृति की महत्वपूर्ण भावना है। इसका अर्थ केवल देवी की प्रतिमा के सामने सिर झुकाना नहीं, बल्कि वास्तविक जीवन में महिलाओं के अधिकारों, गरिमा और स्वतंत्रता का सम्मान करना भी है। मां दुर्गा और महिषासुर की कथा बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। इसका संदेश है कि अन्याय, अहंकार और अत्याचार चाहे कितने ही शक्तिशाली क्यों न हों, उनके विरुद्ध साहस और दृढ़ संकल्प के साथ खड़ा होना जरूरी है। दुर्गा पूजा लोगों को सकारात्मक सोच अपनाने, दूसरों के कल्याण के लिये काम करने और समाज में बेहतर मूल्यों को मजबूत करने की प्रेरणा देती है। यह पर्व याद दिलाता है कि सच्ची शक्ति वही है, जो कमजोरों की रक्षा करे और अन्याय के सामने चुप न रहे।
क्या केवल पूजा से पूरा होगा महिलाओं के सम्मान का संकल्प?
राष्ट्रपति के संदेश का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यही है कि महिलाओं के सम्मान को केवल धार्मिक आयोजनों तक सीमित नहीं रखा जा सकता। घर, कार्यस्थल और समाज, हर जगह महिलाओं के साथ समानता और गरिमा का व्यवहार जरूरी है। महिलाओं की शिक्षा, सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और निर्णय लेने के अधिकारों का सम्मान करना भी इसी भावना का हिस्सा है। यदि समाज मां दुर्गा की आराधना करता है, तो उसे महिलाओं के प्रति भेदभाव और हिंसा के खिलाफ भी खड़ा होना चाहिये। दुर्गा पूजा भारत की समृद्ध आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत का अहम हिस्सा है। इस दौरान पूजा-पंडालों, पारंपरिक कला, संगीत और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को एक साथ आने का अवसर मिलता है। अलग-अलग क्षेत्रों की परंपराएं इस पर्व को विविधता में एकता का प्रतीक बनाती हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुये कामना की कि मां दुर्गा का आशीर्वाद सभी के जीवन में सुख और समृद्धि लाये तथा भारत विकास के रास्ते पर लगातार आगे बढ़ता रहे।








