मोबाइल नेटवर्क की दुनिया बदलने की तैयारी, जानें कैसे…

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New Delhi : भारत का अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (इसरो) साल 2025 के अपने अंतिम मिशन के साथ अंतरिक्ष इतिहास में एक नया अध्याय लिखने जा रहा है। कल यानी बुधवार को इसरो, अमेरिका की कंपनी AST स्पेस मोबाइल के एक अत्याधुनिक संचार सैटेलाइट को अंतरिक्ष में लॉन्च करेगा। इसके लिये 23 दिसंबर से 24 घंटे का काउंटडाउन शुरू हो चुका है। इस मिशन के तहत इसरो का ताकतवर रॉकेट एलवीएम3 (LVM3) अमेरिकी कंपनी के ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 (BlueBird Block-2) सैटेलाइट को पृथ्वी की निचली कक्षा (Low Earth Orbit) में स्थापित करेगा। अगर यह मिशन सफल होता है, तो यह न सिर्फ भारत बल्कि पूरी दुनिया के टेलीकॉम सेक्टर के लिये एक बड़ा मोड़ साबित हो सकता है।

क्या है इसरो का यह मिशन?

इस मिशन का आधिकारिक नाम LVM3-M6 / BlueBird Block-2 है। यह पूरी तरह से कमर्शियल लॉन्च मिशन है, जिसमें इसरो अपने सबसे भारी लॉन्च व्हीकल एलवीएम3 का इस्तेमाल कर रहा है। यह एलवीएम3 की छठी उड़ान होगी और कमर्शियल मिशन के तौर पर तीसरी लॉन्चिंग एलवीएम3 को उसकी जबरदस्त ताकत के कारण पहले ही ‘बाहुबली’ का नाम दिया जा चुका है। ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 सैटेलाइट का वजन करीब 6,500 किलोग्राम है। अगर इसरो इसे सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित करता है, तो यह पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थापित होने वाला अब तक का सबसे बड़ा वाणिज्यिक संचार सैटेलाइट होगा। इससे अंतरराष्ट्रीय कमर्शियल स्पेस मार्केट में भारत की विश्वसनीयता और पकड़ और मजबूत होगी। इससे पहले भी इसरो अपने एलवीएम3 रॉकेट से चंद्रयान-2, चंद्रयान-3 और वनवेब (OneWeb) के 72 सैटेलाइट्स को सफलतापूर्वक लॉन्च कर चुका है। यह सैटेलाइट मोबाइल कनेक्टिविटी की दुनिया में क्रांति ला सकता है।

बिना टावर के मिलेगा मोबाइल नेटवर्क

अगर यह सैटेलाइट पूरी तरह सफल होता है, तो 4G और 5G स्मार्टफोन सीधे सैटेलाइट से जुड़ सकेंगे, बिना किसी मोबाइल टावर के, यानी यूजर को न तो अलग एंटीना चाहिये और न ही कोई खास हार्डवेयर। यह सैटेलाइट हिमालय, रेगिस्तान, महासागर और हवाई उड़ानों के दौरान भी मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध करा सकेगा। जहां पारंपरिक टेलीकॉम नेटवर्क फेल हो जाते हैं, वहां यह तकनीक काम करेगी। आपदा के समय, जब बाढ़, भूकंप या तूफान में टावर तबाह हो जाते हैं, तब भी यह नेटवर्क सक्रिय रह सकता है।

बेहतर स्पीड और क्षमता

ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 को 5,600 से ज्यादा सिग्नल सेल बनाने के लिये डिजाइन किया गया है, अधिकतम 120 Mbps तक की स्पीड देने में सक्षम है। इससे वॉइस कॉल, वीडियो कॉल, हाई-स्पीड इंटरनेट बिना रुकावट के संभव होगा। अगर इसरो यह मिशन सफलतापूर्वक पूरा करता है, तो आगे ये चरण होंगे, सैटेलाइट कक्षा में पहुंचने के बाद 223 वर्ग मीटर (2400 वर्ग फीट) का विशाल एंटीना खोलेगा, यह LEO में सबसे बड़ा कमर्शियल कम्युनिकेशन एंटीना होगा। सबसे पहले अमेरिका में सीमित स्तर पर सेवा शुरू होगी। इसके बाद अलग-अलग देशों से लाइसेंस लेकर इसे ग्लोबल लॉन्च किया जायेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक एलन मस्क की स्टारलिंक जैसी सैटेलाइट इंटरनेट कंपनियों को कड़ी चुनौती दे सकती है, क्योंकि इसमें सीधे मोबाइल फोन से कनेक्टिविटी मिलेगी।

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