Kohramlive : आज रात जैसे ही आसमान में चांद ने अपनी सतरंगी चादर ओढ़ी, देशभर की छतों पर सजे पूजा थाल, जलते दीपक और सजे हुये हाथों में छलकते करवे एक साथ झिलमिलाने लगे। सुहागिनों की आंखों में चमक थी, इंतजार की, प्रेम की और अटूट विश्वास की। सुबह सूर्योदय से आरंभ हुये इस कठिन निर्जला व्रत का समापन चांद के दर्शन के साथ हुआ। राजधानी रांची सहित कई राज्यों की छतों से लेकर मुंबई की ऊंची इमारतों- हवेलियों तक, हर जगह जैसे प्रेम का एक सा रंग बिखर गया हो। पत्नी ने थाली उठाई, छलनी से झांका अपना संसार और जैसे ही पति का चेहरा चांद की किरणों से मिला, हर सुहागिन की आंखें नम हो उठीं। यह क्षण किसी कविता से कम नहीं था।
चंद्रदेव को अर्घ्य देते वक्त महिलाओं ने मधुर स्वर में मंत्रोच्चार किया, “ओम सोमाय नमः” “ओम चंद्राय नमः”
ऐसा विश्वास है कि इन मंत्रों की कंपन से पति-पत्नी के बीच का बंधन और मजबूत होता है, और घर में सुख-शांति बनी रहती है। पति के हाथ से जल ग्रहण करने के बाद जब सुहागिनों ने पहला निवाला खाया, तो हर निवाले में प्रेम का स्वाद था, आस्था का रस था। फिर सास के चरणों में झुककर आशीर्वाद लेने की परंपरा ने इस व्रत को पूर्णता दी। कहीं बादलों ने चांद को छुपा लिया, तो कहीं आसमान ही रूठ गया। लेकिन आस्था का रास्ता नहीं रुकता, कई महिलाओं ने वीडियो कॉल पर दूर शहरों के चांद से अपने व्रत का पारण किया। कुछ ने थाली के जल में झलकते चांद के प्रतिबिंब में अपने प्रिय का चेहरा देखा और प्रेम की लौ बुझने नहीं दी। करवा चौथ की रात्रि ढल चुकी है, मगर आस्था की डोर अब भी थमी नहीं।
अगले पर्व अहोई अष्टमी पर मातायें अपने बच्चों की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए व्रत रखेंगी। यह व्रत 13 अक्टूबर को मनाया जायेगा, जहां हर मां अपने वात्सल्य से आकाश को फिर एक नई दुआ सुनायेगी।










