Ranchi : पहलगाम की वादियों में जब गोलियों की गूंज सुनाई दी, तब शायद ही किसी ने सोचा होगा कि उसका असर झारखंड के शांत शहरों तक पहुंचेगा। मगर अब भारत सरकार का सख्त रुख और सुरक्षा को लेकर नई पहल साफ इशारा कर रही है, दुश्मन की हर साज़िश का जवाब अब हर गली से मिलेगा। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 7 मई को देशभर में एक विशेष मॉक ड्रिल का आदेश जारी किया है। इसका मकसद है—दुश्मन के संभावित हवाई हमले के दौरान आम लोगों को सुरक्षित रखने की तैयारी। झारखंड भी इससे अछूता नहीं रहा। रांची, जमशेदपुर, बोकारो, गोमिया, गोड्डा और साहिबगंज। इन छह शहरों में जंग जैसे हालातों की कल्पना कर मॉक ड्रिल की जायेगी।
जब सायरन गूंजेगा और अंधेरा छा जायेगा…
7 मई की शाम जैसे ही सायरन बजेगा, पूरे शहर की बिजली गुल कर दी जायेगी। गाड़ियां रुक जायेंगी, गलियों में सन्नाटा पसर जायेगा, और लोग अभ्यास करेंगे कि अगर सच में हमला हो जाये, तो कैसे बचा जाये। ये कोई फिल्मी दृश्य नहीं, बल्कि एक गंभीर तैयारी है, जिसमें हर नागरिक की भूमिका अहम होगी।
क्यों चुने गये ये छह शहर
प्रशासन की मानें तो इन शहरों की रणनीतिक अहमियत है
- रांची: सेना की छावनी और प्रशासनिक केंद्र
- जमशेदपुर, बोकारो, गोड्डा: स्टील और पावर हब
- गोमिया: ऑर्डिनेंस फैक्ट्री
- साहिबगंज: गंगा किनारे का बंदरगाह, और बांग्लादेश की सीमा से निकटता
इन्हीं वजहों से इन्हें दुश्मन के संभावित निशाने के रूप में देखा जा रहा है।
कैटेगरी में कैसे बांटे गये हैं शहर
बोकारो, गोमिया, जमशेदपुर और रांची को कैटेगरी-2, जबकि गोड्डा और साहिबगंज को कैटेगरी-3 में रखा गया है। यह वर्गीकरण 2010 में नागरिक सुरक्षा महानिदेशालय द्वारा तय किया गया था, जिसके तहत देशभर की 259 जगहों को तीन श्रेणियों में बांटा गया।










