Uttar Pradesh : अक्सर फिल्मों में कानून अंधा होता है कहते हुए सुना था। आज इस कथन को सही साबित होता दिखा है। जी हां, बरेली पुलिस के एक अंधे अफ्सर को एक लापता बेटी के पिता का दर्द नहीं दिखा। उस पिता की बेबसी, लाचारी नहीं दिखी और बेशर्म ने बिटिया को ढूंढने के लिए मांग लिए 1 लाख रुपए। एक तरफ बेटी के लापता होने का दुख। तो दूसरी तरफ रुपये की मांग से परेशान बाप ने मौत को गले लगा लिया।
इतना ही नहीं आत्महत्या की खबर पाते चौकी प्रभारी राम रतन सिंह मौके पर पहुंचा। उसने सुसाइड नोट पाया और उसे फाड़कर अपनी जेब में रख लिया। बाद में ग्रामीणों ने उसे पकड़ लिया और पुलिस के हवाले कर दिया।
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ये पूरा मामला बरेली के मऊ चांदपुर गांव का है। मृतक शिशुपाल की 22 वर्षीय बेटी कई दिनों से लापता थी। शिशुपाल ने बेटी की अपहरण की प्राथमिकी नौ अप्रैल को आंवला पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई थी। प्राथमिकी में शिशुपाल ने आरोप लगाया था कि बंटी, मुकेश और दिनेश ने उसकी बेटी को बाइक पर अगवा किया था। लेकिन बेटी को खोजने के लिए 1 लाख रुपये की मांग से परेशान शिशुपाल ने खुद को फांसी लगा ली।
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परिजनों ने आरोप लगाते हुए कहा कि शिशुपाल से रामनगर पुलिस चौकी प्रभारी राम रतन सिंह ने एक लाख रुपये की मांग की थी। चौकी प्रभारी ने यह पैसा शिशुपाल की अपहरण की गई 22 वर्षीय बेटी को खोजने के लिए मांगा था। वहीं, एसएसपी ने कहा कि सब-इंस्पेक्टर को चौकी से हटा दिया गया है। साथ ही पैसे मांगने के आरोपों की जांच की जा रही है।






